Varuna Elevated Corridor: वाराणसी में 20 मिनट में एयरपोर्ट, 2044 की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार होगी परियोजना
वाराणसी में 43.218 किमी लंबे वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है। करीब ₹10,998 करोड़ की परियोजना से ट्रैफिक जाम कम होगा और रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट तक का सफर 20 मिनट में पूरा हो सकेगा।
वाराणसी. वाराणसी की शहरी यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 43.218 किलोमीटर लंबे वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। लगभग ₹10,998.32 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना शहर के प्रमुख और सबसे व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक दबाव कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। कॉरिडोर बनने के बाद छावनी, वाराणसी जंक्शन, फुलवरिया और चौकाघाट जैसे क्षेत्रों में यातायात पहले की तुलना में अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को मिलेगी नई रफ्तार
वरुणा नदी के आसपास का क्षेत्र लंबे समय से संकरी सड़कों, मिश्रित यातायात और सीमित पुल क्षमता के कारण जाम की समस्या से जूझता रहा है। पैदल यात्रियों, ई-रिक्शा, निजी वाहनों और मालवाहक ट्रकों के एक साथ चलने से यातायात की गति प्रभावित होती है। एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से वाहनों के लिए ऊपर अलग मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे नीचे की सड़कों पर दबाव कम होगा और शहर के भीतर आवागमन अधिक व्यवस्थित बन सकेगा।
दो पैकेज में तैयार होगी परियोजना
परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले पैकेज में एनएच-31 से फुलवरिया जंक्शन तक 28.498 किलोमीटर का मार्ग तैयार होगा, जिसमें 6-लेन मुख्य कैरिजवे के साथ फ्लाईओवर, रैंप, लूप और सर्विस रोड शामिल होंगे। दूसरे पैकेज में फुलवरिया जंक्शन से काशी रेलवे स्टेशन तक 14.720 किलोमीटर का मार्ग विकसित किया जाएगा, जिसमें 4 और 6 लेन का मुख्य मार्ग तथा रैंप बनाए जाएंगे। परियोजना में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड एलाइनमेंट का मिश्रित मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे मौजूदा सड़क नेटवर्क के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट तक 20 मिनट का सफर
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ वाराणसी आने वाले यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को मिलेगा। कॉरिडोर बनने के बाद रेलवे स्टेशन से लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचने का समय लगभग 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा। करीब 40 मिनट की समय बचत से यात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों को तेज और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा।
स्थानीय ट्रैफिक को भी मिलेगा फायदा
कॉरिडोर केवल लंबी दूरी के वाहनों के लिए नहीं, बल्कि शहर के स्थानीय यातायात को भी ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, चौकाघाट, फुलवरिया और वाराणसी जंक्शन जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के लिए विशेष लूप और रैंप बनाए जाएंगे। इससे इन इलाकों में वाहनों का दबाव कम होगा और लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या में उल्लेखनीय सुधार आने की संभावना है।
2044 की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार होगा ढांचा
परियोजना को भविष्य की यातायात आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किया गया है। अनुमान है कि वर्ष 2044 तक इस कॉरिडोर पर प्रतिदिन लगभग 59,000 पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) का यातायात रहेगा। इसी संभावित मांग को देखते हुए 4 से 6 लेन की एलिवेटेड संरचना विकसित की जा रही है, ताकि आने वाले वर्षों में वाराणसी को तेज, सुरक्षित और आधुनिक शहरी परिवहन व्यवस्था उपलब्ध हो सके।




