मेघालय हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी ने कोर्ट में किया सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा जेल पहुंची
मेघालय के चर्चित हनीमून हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद आखिरकार अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया है। मृतक के परिवार ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं जांच एजेंसियों को छह महीने के भीतर मामले का ट्रायल पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। जानिए इस हाई-प्रोफाइल मामले के पूरे घटनाक्रम से जुड़ी हर बड़ी अपडेट।
शिलांग. देशभर में चर्चित मेघालय हनीमून हत्याकांड में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश आने के बाद निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत की कार्रवाई के तुरंत बाद उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया है। इससे पहले वे लगभग तीन महीने तक जमानत पर बाहर थीं। पुलिस अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है। इस फैसले के बाद मृतक राजा रघुवंशी के परिजनों ने राहत की सांस ली है और न्यायपालिका के प्रति आभार जताया है।
जमानत आदेश रद्द करते हुए शीर्ष अदालत का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए पूर्व में दी गई जमानत को एक बड़ी गलती करार दिया था। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने तकनीकी कमियों का हवाला देकर राहत देने में जल्दबाजी दिखाई थी। शीर्ष अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के आधार पूरी तरह न बताना और प्रक्रियात्मक विवरण में मामूली कमी होना दो अलग बातें हैं। अदालत ने पुलिस प्रशासन को आदेश दिया है कि इस मुकदमे की सुनवाई छह महीने की तय सीमा में पूरी की जाए, ताकि न्याय में देरी न हो।
निष्पक्ष ट्रायल और साक्ष्यों की सुरक्षा पर जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की कि मुकदमे के इस अहम मोड़ पर आरोपी का जेल से बाहर रहना गवाहों और सबूतों को प्रभावित कर सकता है। सरकारी पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने पाया कि मेरिट के आधार पर याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी थीं। ऐसे में केवल प्रक्रियात्मक आधार पर रिहाई देना कानून के अनुकूल नहीं था। शीर्ष अदालत के इस रुख के बाद जांच एजेंसियों पर भी तय समयसीमा के भीतर निष्पक्ष तरीके से ट्रायल प्रक्रिया संपन्न कराने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
सोहरा की वादियों से खाई तक: घटनाक्रम का पूरा ब्यौरा
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब इंदौर का यह नवविवाहित जोड़ा मेघालय के सोहरा क्षेत्र में घूमने पहुंचा था। मई के अंत में अचानक दोनों के लापता होने की खबर आई, जिसके बाद तलाशी अभियान शुरू किया गया। जून की शुरुआत में चेरापूंजी के पास स्थित एक गहरी खाई से पति का शव बरामद हुआ। पुलिसिया जांच में यह बात सामने आई कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। मेघालय पुलिस ने जांच पूरी करते हुए सैकड़ों पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें साजिशकर्ताओं और कॉन्ट्रैक्ट किलर्स के नाम शामिल किए गए।
न्याय की उम्मीद और आगे की कानूनी प्रक्रिया
इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद से ही कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि आगामी छह महीनों में न्यायालय का अंतिम फैसला आ जाएगा और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी। पुलिस द्वारा जुटाए गए तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत में सुनवाई तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। आरोपी के दोबारा जेल जाने से इस सनसनीखेज हत्याकांड के ट्रायल को बिना किसी बाहरी प्रभाव के पूरा करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।




