डीजल का घटा वर्चस्व: सीवी सेक्टर में सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ेगी रफ्तार
रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार, वर्ष 2029-30 तक वाणिज्यिक वाहनों में सीएनजी, एलएनजी और ईवी जैसे वैकल्पिक ईंधनों की हिस्सेदारी बढ़कर 45 प्रतिशत हो सकती है।

देश के वाणिज्यिक वाहन (सीवी) उद्योग में सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी इक्रा द्वारा जारी नवीनतम आकलन के अनुसार, वित्त वर्ष 2029-30 तक वाणिज्यिक वाहनों के कुल बेड़े में इन हरित ईंधनों की हिस्सेदारी बढ़कर 40 से 45 प्रतिशत के बीच पहुंच सकती है।
सीएनजी, एलएनजी और ईवी की श्रेणीवार बाजार में स्थिति
इक्रा के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन का योगदान 27 प्रतिशत दर्ज किया गया था। एजेंसी का अनुमान है कि 2029-30 तक इस उद्योग में सीएनजी और एलएनजी की हिस्सेदारी बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत हो जाएगी, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों का दायरा 10 से 15 प्रतिशत के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रिक बसों और सख्त उत्सर्जन नियमों से घट रही डीजल पर निर्भरता
वाणिज्यिक वाहन श्रेणी में इलेक्ट्रिक तकनीक की बढ़ती पैठ में मध्यम और भारी श्रेणी की बसों की प्रमुख भूमिका रहने वाली है। सख्त होते उत्सर्जन मानकों और वैकल्पिक ईंधनों की कम कुल परिचालन लागत (टीसीओ) के चलते पारंपरिक ईंधन डीजल का प्रभाव लगातार कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में वाणिज्यिक वाहन उद्योग में डीजल की हिस्सेदारी जो 86 प्रतिशत थी, वह वित्त वर्ष 2025-26 में सिमटकर 67 प्रतिशत पर आ गई है।
पेट्रोल वाहनों का सीमित दायरा और सरकारी योजनाओं का प्रोत्साहन
वाणिज्यिक श्रेणी में पेट्रोल ईंधन की भूमिका काफी सीमित बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई, जिनका उपयोग केवल छोटे एवं हल्के वाणिज्यिक वाहनों (एलसीवी) तक सीमित रहा। दूसरी ओर, ‘पीएम ई-ड्राइव’ जैसी सरकारी प्रोत्साहन नीतियों ने इलेक्ट्रिक ट्रकों की खरीद लागत को कम करने में मदद की है, जिससे ई-ट्रकों को अपनाने में तेजी आने की संभावना है।
नई तकनीकों को अपनाने में शुरुआती लागत और बुनियादी ढांचे की चुनौतियां
संभावनाओं के बावजूद इस क्षेत्र को कई व्यावहारिक समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है। इक्रा की वरिष्ठ उपाध्यक्ष किंजल शाह के अनुसार, हरित ईंधनों के प्रति बढ़ते रुझान के बाद भी वाहनों की ऊंची शुरुआती कीमत और चार्जिंग या रीफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी मुख्य बाधाएं बनी हुई हैं। इसके अतिरिक्त वाहनों की रेंज, सर्विस नेटवर्क और रूट की परिचालन स्थितियां भी भविष्य में इन तकनीकों की स्वीकृति दर निर्धारित करेंगी।




