बिलासपुर अरपा भैंसाझार परियोजना: 27 करोड़ के मुआवजा घोटाले में 11 तत्कालीन SDM पर शिकंजा
बिलासपुर जिले की प्रमुख अरपा भैंसाझार सिंचाई परियोजना में 11 तत्कालीन उप-मंडल मैजिस्ट्रेट (SDM) स्तर के अफसरों पर नियमों के खिलाफ 27 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा बांटने का आरोप है। संभागायुक्त ने अपर कलेक्टर के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच दल गठित कर 15 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
बिलासपुर. बिलासपुर जिले की महत्वपूर्ण अरपा भैंसाझार सिंचाई परियोजना के भूमि अधिग्रहण और क्षतिपूर्ति आवंटन में बड़ा प्रशासनिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। सरकारी अभिलेखों की गहन पड़ताल के दौरान यह तथ्य उजागर हुआ है कि 11 तत्कालीन उप-मंडल अधिकारियों ने तय मापदंडों का उल्लंघन करते हुए राशि बांटी। शुरुआती प्रशासनिक समीक्षा में लगभग 27 करोड़ रुपये की गंभीर गड़बड़ी की पुष्टि हुई है, जिसके बाद पूरे तंत्र में हड़कंप मच गया है।
प्रवर्तन निदेशालय के पत्र पर उच्चस्तरीय जांच का गठन
इस बड़े वित्तीय मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) से प्राप्त पत्राचार के उपरांत संभागायुक्त ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रकरण की निष्पक्ष पड़ताल हेतु अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है। इस दल में संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर तथा राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को रखा गया है। गठित पैनल को संपूर्ण अभिलेखों का परीक्षण करके अगले 15 दिनों की समयावधि के भीतर अपनी विस्तृत आख्या शासन को सौंपने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
75 प्रभावित गांवों में नियमों का उल्लंघन
परियोजना से प्रभावित कुल 104 गांवों में से 75 गांवों में भूमि अर्जन के समय गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाई गईं। राजस्व दस्तावेजों के परीक्षण से पता चला कि भूमि के प्रकार, दावेदारों की पात्रता तथा संपत्ति मूल्यांकन में त्रुटियां की गईं। इसके चलते कई अपात्र व्यक्तियों को निर्धारित सीमा से अत्यधिक धन आवंटित कर दिया गया। तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा स्वीकृत प्रकरणों में वित्तीय नियमों को दरकिनार करने के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं।
सीमित दंडात्मक कार्रवाई पर उठे सवाल
प्रकरण में अब तक की गई दंडात्मक कार्रवाई के नाम पर महज एक अधिकारी को ही निलंबित किया गया है, जबकि अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया। कई नाम उजागर होने के बावजूद कार्रवाई सीमित रहने से प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। नई जांच समिति को फसलों के सही आकलन, किसान पात्रता, राजस्व रिकॉर्ड संशोधन, सीमांकन तथा सरकारी कोष को क्षति पहुंचाने वाले प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका तय करने का कार्य सौंपा गया है।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल
अरपा भैंसाझार परियोजना जिले की सबसे प्रमुख जल संरचनाओं में से एक है, इसलिए इतनी बड़ी राशि के गबन की खबर ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। वर्तमान में सबकी नजरें जांच दल द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी कि इस धांधली में कौन-कौन शामिल था और उन पर क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



