टीबी मुक्त भारत अभियान: निक्षय मित्र बनकर मरीज को दें नया जीवन, जानिए जशपुर के निरंजन गुप्ता की प्रेरणादायक पहल
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत निक्षय मित्र बनकर मरीज को पोषण और सामाजिक संबल प्रदान किया जा सकता है। जशपुर के निरंजन प्रसाद गुप्ता की प्रेरणादायक पहल से पीवीटीजी समुदाय के 60 मरीजों को नया जीवन मिला है। जानिए कैसे एक निक्षय मित्र टीबी से जंग जीतने में मददगार साबित होता है।
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत “निक्षय मित्र” योजना मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने 60 टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके नियमित पोषण और इलाज की जिम्मेदारी निभाई, जिसके लिए उन्हें राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
टीबी के विरुद्ध सामाजिक संबल की आवश्यकता
टीबी केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह गरीबी, कुपोषण और सामाजिक उपेक्षा से जुड़ा गंभीर संकट है। जब कोई व्यक्ति इस रोग की चपेट में आता है, तो उसे नियमित दवाइयों के साथ-साथ पौष्टिक खुराक और सामाजिक समर्थन की भी उतनी ही आवश्यकता होती है। पोषण की कमी के कारण अनेक मरीज इलाज का चक्र अधूरा छोड़ देते हैं। इसी वजह से प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत निक्षय मित्र की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से निक्षय मित्र पहल की एक अनुकरणीय मिसाल सामने आई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने अक्टूबर 2024 में निक्षय मित्र के रूप में कार्य करना प्रारंभ किया। उन्होंने पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के 19 मरीजों सहित कुल 60 टीबी पीड़ित व्यक्तियों की मदद का बीड़ा उठाया। दुर्गम क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मरीजों को नियमित पोषण आहार और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
जागरूकता और नियमित उपचार पर जोर
मरीजों की मदद के दौरान केवल पोषण किट बांटने तक काम सीमित नहीं रहा, बल्कि घर-घर जाकर टीबी के लक्षणों, दवा के नियमित सेवन और संक्रमण रोकने के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। लगातार संवाद बनाए रखने से जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा मजबूत हुआ। इस व्यक्तिगत जुड़ाव के कारण मरीजों में दवा बीच में छोड़ने की प्रवृत्ति कम हुई और उपचार की निरंतरता कायम रही।
कुपोषण और टीबी के चक्र पर प्रहार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कुपोषण और टीबी का परस्पर गहरा संबंध है। कुपोषण से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटती है, जिससे टीबी का खतरा बढ़ता है और बीमारी की स्थिति में शरीर और अधिक कमजोर हो जाता है। निक्षय मित्र द्वारा उपलब्ध कराया गया पोषण सहायता किट मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करता है। इस उत्कृष्ट सेवा भाव के लिए निरंजन गुप्ता को दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से अलंकृत किया गया।
राष्ट्रीय अभियान में जनभागीदारी का आह्वान
टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रह सकती, इसके लिए नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। जशपुर का यह उदाहरण दर्शाता है कि एक व्यक्ति का संवेदनशील प्रयास दर्जनों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। समाज के सक्षम नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और व्यावसायिक संगठनों को आगे आकर निक्षय मित्र के रूप में पंजीकृत होना चाहिए ताकि हर मरीज को पूर्ण उपचार और पोषण का अधिकार मिल सके।



