हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का सिरमौर बना मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली सम्मेलन में साझा कीं बड़ी उपलब्धियां
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली में सातवें अंतरराष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में मध्यप्रदेश की उपलब्धियां साझा कीं। राज्य ने वर्ष 2030 के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप पिछले बारह वर्षों में हरित ऊर्जा क्षमता में पच्चीस गुना वृद्धि की है। रीवा और आगर-शाजापुर जैसी बड़ी परियोजनाओं से प्रदेश देश का प्रमुख ग्रीन एनर्जी हब बन गया है।
भोपाल. दिल्ली में आयोजित सातवें अंतरराष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन-2026 में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश ने पिछले बारह वर्षों में अपनी हरित ऊर्जा क्षमता को 438 मेगावाट से बढ़ाकर 11,000 मेगावाट कर लिया है। रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना और नवीन बैटरी स्टोरेज सिस्टम के जरिए प्रदेश सतत विकास की दिशा में अग्रसर है।
दिल्ली सम्मेलन में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का प्रदर्शन
नई दिल्ली में आयोजित सातवें अंतरराष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी-2026 के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने देश के 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में राज्य की पूरी प्रतिबद्धता दोहराई। पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एयरपोर्ट से शिवाजी स्टेडियम तक दिल्ली मेट्रो की एक्सप्रेस लाइन से सफर कर उन्होंने हरित ऊर्जा के प्रति स्पष्ट संदेश दिया। इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, एचडी कुमार स्वामी सहित देश-विदेश के ऊर्जा विशेषज्ञ और नीति-निर्माता उपस्थित रहे।
हरित ऊर्जा के मामले में बारह वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि पिछले बारह वर्षों में राज्य की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 438 मेगावाट से बढ़कर 11,000 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जो लगभग पच्चीस गुना वृद्धि को दर्शाती है। बीते दो वर्षों के भीतर सरकार द्वारा नवकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और बायोमास नीतियां लागू किए जाने से निवेश के नए रास्ते खुले हैं। राज्य अपनी पारदर्शी नीतियों और प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के बल पर देश के प्रमुख ग्रीन एनर्जी हब के रूप में तेजी से उभर रहा है।
रीवा और आगर-शाजापुर परियोजनाओं की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
प्रदेश की अनूठी पहलों में 750 मेगावाट की रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना ने इतिहास रचते हुए कोयला आधारित बिजली से भी कम टैरिफ हासिल किया। विश्व बैंक से उत्कृष्टता पुरस्कार पाने वाली इस परियोजना की केस स्टडी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती है। इसके साथ ही 1,500 मेगावाट क्षमता वाली आगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना में 2.14 रुपये प्रति यूनिट का न्यूनतम टैरिफ मिला है, जिसके माध्यम से आठ राज्यों के भारतीय रेलवे नेटवर्क को हरित विद्युत की आपूर्ति की जा रही है।
फ्लोटिंग सोलर और बैटरी ऊर्जा भंडारण में नए आयाम
ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता को मजबूत करने के लिए बैटरी स्टोरेज आधारित परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुरैना में स्थापित होने वाली 440 मेगावाट सौर और 880 मेगावाट-घंटा बैटरी भंडारण परियोजना राज्य का पहला ऐसा मॉडल है। इसके अलावा पच्चीस दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 278 मेगावाट की देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना का लोकार्पण किया गया, जो जल निकायों के कुशल उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
रूफटॉप सोलर और कृषि फीडर योजना से सशक्त होता ग्रामीण क्षेत्र
विकेंद्रीकृत ऊर्जा उत्पादन को गति देने के लिए ‘सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना’ के तहत लगभग 14,900 मेगावाट के प्रस्ताव मिले हैं, जिसमें किसानों और लघु उद्यमों की सक्रिय भागीदारी है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत डेढ़ लाख से अधिक घरों में 566 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जबकि सरकारी इमारतों पर भी यह कार्य तेजी से चल रहा है। इन बहुआयामी प्रयासों से मध्य प्रदेश सतत विकास और ऊर्जा स्वतंत्रता के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहा है।




