उत्तर प्रदेशराज्य

फर्जी दूतावास चलाने वाला हर्षवर्धन जैन निकला चंद्रास्वामी का शागिर्द, 2011 में भी हो चुका है गिरफ्तार

गाजियाबाद 

दिल्ली से महज 35 किमी दूर अपने किराए के मकान सें West Artica, Saborga, Poulvia, Londonia जैसे काल्पनिक देशों के फर्जी दूतावास चलाने वाले स्वयंभू राजनयिक हर्षवर्धन जैन को लेकर कई खुलासे हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने आरोपी को गाजियाबाद के कविनगर इलाके से अरेस्ट किया था.

आरोपी खुद को इन काल्पनिक देशों का कॉन्सुल या एम्बेसडर बताता था और विदेशों में नौकरी तथा बिजनेस डील कराने का वादा करके लोगों से पैसे ऐंठता था. उसका यह ठगी का नेटवर्क सात साल तक एक्टिव रहा.

एसटीएफ ने हर्षवर्धन को उसके किराए के मकान से गिरफ्तार कर 44.7 लाख रुपये नकद, 34 रबर स्टैंप, विदेशी मुद्रा, 12 फर्जी राजनयिक पासपोर्ट, 18 नकली डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट और चार लग्जरी गाड़ियां जब्त कीं.

चंद्रास्वामी और हथियार डीलर से भी जुड़े थे तार
पुलिस के अनुसार, हर्षवर्धन जैन का विवादास्पद धर्मगुरु और तांत्रिक चंद्रास्वामी और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्कर अदनान खशोगी से भी पुराना संबंध रहा है. साल 2011 में भी काविनगर थाने में उस पर अवैध सैटेलाइट फोन रखने का मामला दर्ज हुआ था.

पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के करीबी माने जाने वाले तांत्रिक चंद्रास्वामी का विवादों से गहरा नाता रहा है. नरसिम्हा राव सरकार के दौरान सामने आए कई घोटालों की परछाई चंद्रास्वामी तक भी पहुंची थी. हालात ऐसे बने कि उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भी जाना पड़ा.

हर्षवर्धन ने पीएम, राष्ट्रपति और अन्य नामी हस्तियों के साथ एडिट की गई तस्वीरें भी इस्तेमाल कीं ताकि लोगों पर प्रभाव डाल सके और ठगी कर सके. उसके पास से फर्जी विदेश मंत्रालय की मुहर, प्रेस कार्ड, और विभिन्न देशों की सील भी बरामद की गई है.

नौकरी और हवालाबाजी के नाम पर चलाता था ठगी रैकेट
एसटीएफ एसएसपी सुशील घुले ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि जैन कई देशों के राजदूतों का रूप धारण कर रहा था और लोगों को विदेश में नौकरी और संपर्क का झूठा वादा करके उन्हें फंसा रहा था. उन्होंने आगे बताया, "उसका मुख्य उद्देश्य इन फर्जी पहचानों का इस्तेमाल दलाली करने, विदेशों में नौकरी दिलाने का दावा करने और फर्जी कंपनियों के जरिए हवाला रैकेट चलाने के लिए करना था."

वह फर्जी दूतावास की आड़ में हवाला कारोबार और दलाली का रैकेट भी चला रहा था. 2011 में कविनगर थाने में दर्ज मामले के अलावा अब एक बार फिर उसके खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की गई है. एसटीएफ इंस्पेक्टर सचिन कुमार ने पीटीआई को बताया कि जैन के फर्जी दूतावास में "इन देशों के झंडे" भी लगे थे, जिन्हें असली वाणिज्य दूतावास का आभास देने के लिए परिसर में नियमित रूप से फहराया जाता था.

INE Desk

हम देश और दुनिया की हर बड़ी घटना को बिना किसी लाग-लपेट के, सटीक और तेजी से आप तक पहुंचाते हैं। हमारी टीम सच्चाई के लिए प्रतिबद्ध है और गहन विश्लेषण के साथ हर कोने से समाचार लाती है। चाहे राजनीति हो, व्यापार, खेल, मनोरंजन या टेक्नोलॉजी, हमारा उद्देश्य है कि आप हर विषय पर अपडेट रहें। हम गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता में विश्वास करते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button