राजनीतिक

टी राजा सिंह के इस्तीफे से आया राजनीतिक भूचाल—तेलंगाना का समीकरण किस दिशा में?

हैदराबाद 
 बीजेपी के बड़े नेताओं ने गोशामहल के MLA और हिंदुत्व के पोस्टर बॉय टी राजा सिंह का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। इससे तेलंगाना की राजनीति में और बीजेपी के अंदर बड़ा बदलाव आया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने एक पत्र में इस्तीफे की मंजूरी की जानकारी दी। उन्होंने साफ कहा कि टी राजा सिंह ने इस्तीफे में जो कारण बताए हैं, वे अप्रासंगिक हैं। ये कारण पार्टी की विचारधारा, काम करने के तरीके, सिद्धांतों और अनुशासन से मेल नहीं खाते।

टी राजा सिंह ने पहले राज्य के नेताओं को इस्तीफा सौंपा था। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आदेश के बाद इसे तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया गया।

क्या बोले टी राजा सिंह
इस्तीफा मंजूर होने के बाद टी राजा सिंह ने कहा कि मैं 11 साल पहले बिना किसी निजी महत्वाकांक्षा के पार्टी में शामिल हुआ था। मैं ईमानदारी और निष्ठा से हिंदुत्व के लिए काम करता रहूंगा। उनका ये बयान दिखाता है कि वे अभी भी अपने विचारों पर कायम हैं।

एकला चलो की राह पर टी राजा सिंह?
पहले ये अटकलें लगाई जा रही थीं कि टी राजा सिंह उद्धव ठाकरे की शिवसेना या पवन कल्याण की जन सेना में शामिल हो सकते हैं। लेकिन, शुक्रवार को उन्होंने कहा कि वे फिलहाल किसी भी पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं। इससे उनके समर्थकों में थोड़ा असमंजस है।

तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर विवाद?
दस दिन पहले, उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने यह इस्तीफा केंद्रीय नेतृत्व के उस फैसले के विरोध में दिया था, जिसमें पूर्व MLC एन रामचंदर राव को तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरने को कहा गया था। टी राजा सिंह भी इस पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं ने, जिनमें केंद्रीय मंत्री और चुनाव प्रभारी शोभा करंदलाजे भी शामिल थीं, उनकी उम्मीदवारी को बाधित किया।

तेलंगाना बीजेपी ने क्या कहा
हालांकि, तेलंगाना बीजेपी ने इन आरोपों को गलत बताया है। पार्टी का कहना है कि सिंह के पास राज्य कार्यकारिणी समिति के 10 सदस्यों का समर्थन नहीं था, जो कि जरूरी है। अभी तक सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा नहीं सौंपा है। इसलिए, उनकी विधानसभा सीट का क्या होगा, ये अभी साफ नहीं है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ये अभी तय नहीं है कि केंद्रीय नेतृत्व उनका इस्तीफा स्पीकर को भेजेगा या ये फैसला सिंह पर ही छोड़ देगा।

निलंबित भी किए गए थे टी राजा सिंह
टी राजा सिंह की बीजेपी से दूरी उनके दूसरे कार्यकाल में लगातार बढ़ती गई। इसकी वजह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी के साथ उनकी अनबन बताई जा रही है। उन्हें पहले कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी पर विवादित टिप्पणी करने के कारण निलंबित भी किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें वापस ले लिया गया था।

भाजपा ने मुझ पर विश्वास करते हुए लगातार तीन बार तेलंगाना विधानसभा चुनाव में गोशामहल से विधायक पद का टिकट दिया। इस विश्वास के लिए मैं भाजपा के सभी पदाधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। आज भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।शायद मैं तेलंगाना में भाजपा की सरकार बनाने का सपना लेकर दिन-रात मेहनत कर रहे लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं की पीड़ा दिल्ली तक नहीं पहुंचा सका।मैं यह बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह निर्णय मैंने किसी पद, सत्ता या व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण नहीं लिया है। मेरा जन्म हिंदुत्व की सेवा के लिए हुआ है, और मैं अंतिम सांस तक हिंदुत्व के लिए कार्य करता रहूंगा। मैं सदैव पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और सनातन धर्म की रक्षा हेतु कार्य करता रहूंगा। समाज की सेवा और हिन्दू समाज के अधिकारों के लिए मैं अंतिम सांस तक अपनी आवाज बुलंद करता रहूंगा।जय श्री राम।

INE Desk

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