अटल बिहारी वाजपेयी बनने के लिए पंकज त्रिपाठी ने की कड़ी मेहनत, किताबों और भाषणों से समझा निजी व्यक्तित्व
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बायोपिक 'मैं अटल हूं' में पंकज त्रिपाठी ने उनके किरदार को जीवंत करने के लिए कई किताबें पढ़ीं और भाषण सुने। जानिए पर्दे के पीछे की मेहनत।
बॉलीवुड के मंझे हुए अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपनी बायोपिक फिल्म ‘मैं अटल हूं’ में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका निभाने के लिए बेहद कड़ा अभ्यास किया। एक साक्षात्कार के दौरान अभिनेता ने साझा किया कि इस महान व्यक्तित्व की सोच और दृष्टिकोण को समझने के लिए उन्होंने उन पर लिखी गई तमाम पुस्तकें पढ़ीं। इसके अतिरिक्त उनके ऐतिहासिक भाषणों को बार-बार सुनकर उनकी विचारशैली और भाषण कला की गहराई को आत्मसात करने का प्रयास किया गया।
मिमिक्री न आने के कारण चुनौती बनी आवाज और हाव-भाव
अभिनेता ने सहजता से स्वीकार किया कि वे किसी व्यक्ति की आवाज या शारीरिक हाव-भाव की नकल उतारने में बहुत माहिर नहीं हैं। इसी वजह से एक देशप्रिय राजनेता के अनूठे अंदाज़ को स्क्रीन पर प्रस्तुत करना उनके लिए काफी कठिन रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आवाज का अनुकरण कर देना पर्याप्त नहीं था, बल्कि वाजपेयी जी के आंतरिक भावों, संवेदनात्मक गहराई और उनके सिद्धांतों को समझकर उन्हें अभिनय में उतारना सबसे मुख्य लक्ष्य था।
पहले ही दिन का दृश्य जब ट्रेलर में दिखा तो बढ़ी चिंता
शूटिंग के शुरुआती दिनों का संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने बताया कि फिल्म के प्रचार तंत्र में इस्तेमाल हुआ एक मुख्य दृश्य दरअसल शूटिंग के प्रथम दिवस ही रिकॉर्ड किया गया था। जब उस दृश्य को बाद में ट्रेलर में देखा तो मन में थोड़ी घबराहट और आशंका उत्पन्न हुई कि शुरुआती प्रयास को ही अंतिम रूप दे दिया गया। हालांकि बाद में उन्हें बोध हुआ कि किसी भी महान हस्ती का वास्तविक परिचय मात्र बाहरी रूप-रंग से परे उनकी विचारधारा और जीवन यात्रा से होता है।
सार्वजनिक जीवन के साथ निजी संवेदनाओं को समझना आवश्यक
चरित्र की बारीकियों पर बात करते हुए अभिनेता ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन से तो पूरा देश भली-भांति परिचित है, लेकिन उनके व्यक्तिगत जीवन की संवेदनाओं और संघर्षों को समझना सबसे जटिल काम था। किसी भी वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा में केवल बाहरी वेशभूषा धारण कर लेना काफी नहीं होता, बल्कि उस महान व्यक्तित्व की मौलिक भावना को महसूस करना जरूरी होता है। उल्लेखनीय है कि रवि जाधव के कुशल निर्देशन में निर्मित यह बायोपिक पूर्व में ही दर्शकों के बीच आ चुकी है।




