केन-बेतवा परियोजना: प्रशासन की कार्रवाई के बाद 17 दिन पुराना ‘चिता आंदोलन’ समाप्त, अनशन जारी
केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों के 17 दिन से जारी चिता आंदोलन पर प्रशासन ने कार्रवाई की। करीब 300 प्रदर्शनकारियों को हटाया गया, जबकि आंदोलन के नेतृत्वकर्ता ने अस्पताल से अनशन जारी रखने की घोषणा की।
छतरपुर. छतरपुर जिले के कुपी गांव में केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों का 17 दिनों से जारी ‘चिता आंदोलन’ सोमवार तड़के प्रशासनिक कार्रवाई के बाद समाप्त हो गया। सुबह पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो कई महिला और पुरुष प्रदर्शनकारी बराना नदी के बहते पानी में उतर गए। अधिकारियों ने पहले उन्हें बाहर आने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बनने पर पुलिस ने नदी में उतरकर सभी को बाहर निकाला और उन्हें हिरासत में लेकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य को बताया कार्रवाई का कारण
प्रशासन का कहना है कि लगातार हो रही बारिश और आंदोलनकारियों की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल बाहरी जिलों के लोगों को बसों के माध्यम से उनके गृह क्षेत्र भेजा गया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर को चिकित्सकीय निगरानी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां से उन्होंने अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने की घोषणा की है।
करीब 300 आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया
केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवार विस्थापन और मुआवजे से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान लगभग 300 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें पन्ना जिले ले जाया गया, जहां कुछ स्थानों पर पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। प्रशासन ने बताया कि सभी लोगों को उनके क्षेत्रों तक सुरक्षित पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
आंदोलनकारियों ने लगाए बल प्रयोग के आरोप
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके साथ बल प्रयोग किया और कई महिलाओं को जबरन हटाया गया, जिससे कुछ लोगों को चोटें भी आईं। आंदोलनकारियों का कहना है कि घायल लोगों को तत्काल उपचार की सुविधा नहीं मिल सकी। वहीं पुलिस का पक्ष है कि पूरी कार्रवाई कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
मुआवजे और अनियमितताओं के आरोपों पर विवाद
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने परियोजना से जुड़े मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि वास्तविक पात्रों तक मुआवजा पूरी तरह नहीं पहुंचा, जबकि अन्य खातों में राशि हस्तांतरित किए जाने की शिकायतें हैं। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों ने प्रशासन पर आंदोलन को समय से पहले समाप्त कराने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी मांगों पर अभी भी संतोषजनक समाधान नहीं निकला है। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच इस मुद्दे पर आगे भी संवाद की संभावना बनी हुई है।




