मध्यस्थता नहीं, कोर्ट में फैसला चाहिए: ज्ञानवापी समेत तीन बड़े धार्मिक विवादों पर नया मोड़
ज्ञानवापी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल शाही जामा मस्जिद विवाद में हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। अब तीनों मामलों की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी। जानिए विवादों की पृष्ठभूमि और आगे की कानूनी दिशा।
नई दिल्ली. ज्ञानवापी मस्जिद, श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए मध्यस्थता के सुझाव को हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्षों ने स्वीकार नहीं किया है। शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों से आपसी सहमति के आधार पर विवाद सुलझाने की संभावना पर विचार करने को कहा था, लेकिन दोनों पक्षों ने स्पष्ट कर दिया कि इन संवेदनशील मामलों का समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होना चाहिए। ऐसे में अब इन मामलों की सुनवाई अदालत में ही आगे बढ़ेगी।
ज्ञानवापी विवाद की पृष्ठभूमि
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर देश के सबसे चर्चित धार्मिक विवादों में शामिल है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में ध्वस्त कर उसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण कराया गया था। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मामला उपासना स्थल अधिनियम, 1991 के दायरे में आता है और मस्जिद में लंबे समय से नियमित नमाज अदा की जाती रही है।
वर्ष 2021 में पांच महिलाओं द्वारा पूजा की अनुमति मांगने के बाद यह मामला नई कानूनी दिशा में आगे बढ़ा। सर्वेक्षण के दौरान वज़ूखाने में मिले एक ढांचे को हिंदू पक्ष शिवलिंग बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारे का हिस्सा मानता है। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उस स्थान को संरक्षित रखने के साथ यह भी सुनिश्चित किया कि मुस्लिम श्रद्धालुओं की नमाज में कोई बाधा न आए। बाद में अदालत ने व्यास जी के तहखाने में नियमित पूजा की अनुमति देने वाले वाराणसी अदालत के आदेश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद
मथुरा का यह विवाद 13.37 एकड़ परिसर से जुड़ा है, जहां श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद स्थित हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन मंदिर के स्थान पर किया गया था। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष उपासना स्थल अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए इन दावों का विरोध करता है।
इस विवाद से जुड़े 18 मुकदमे इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित हैं। अगस्त 2024 में हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें हिंदू पक्ष के मुकदमों की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने माना था कि इन मामलों की सुनवाई पर उपासना स्थल अधिनियम, वक्फ अधिनियम या परिसीमा कानून स्वतः रोक नहीं लगाते।
संभल शाही जामा मस्जिद मामला
उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद को लेकर भी विवाद अदालत तक पहुंचा। हिंदू पक्ष का आरोप है कि मस्जिद का निर्माण हरिहर मंदिर को ध्वस्त कर कराया गया था। स्थानीय अदालत के आदेश पर हुए सर्वेक्षण के दौरान दूसरे चरण में तनाव बढ़ गया और प्रदर्शनकारियों व सुरक्षाबलों के बीच झड़प में चार लोगों की मौत तथा कई लोग घायल हुए।
मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मस्जिद समिति को पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए बिना कार्रवाई की गई। साथ ही उपासना स्थल अधिनियम के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।
अब आगे क्या होगा?
दोनों पक्षों द्वारा मध्यस्थता का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद अब ज्ञानवापी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल से जुड़े सभी प्रमुख विवाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेंगे। इन मामलों में संबंधित अदालतें उपलब्ध साक्ष्यों, कानूनी प्रावधानों और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर आगे की सुनवाई करेंगी। ऐसे में इन ऐतिहासिक और संवेदनशील मामलों की अगली सुनवाई और अदालत के आदेशों पर देशभर की नजर बनी रहेगी।




