संसद मार्च के दौरान पुलिस अलर्ट, आंसू गैस और लाठीचार्ज के बीच सरकार-सीजेपी वार्ता
संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी संसद भवन के निकट तक पहुंच गए, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई। पुलिस ने आगे बढ़ने से रोकने के लिए बल प्रयोग किया। इसी बीच सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई, जिसमें तीन प्रमुख मांगें सामने रखी गईं।
नई दिल्ली. संसद मार्च के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले निकला प्रदर्शन संसद भवन के आसपास तक पहुंच गया। लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिला कि कोई बड़ा प्रदर्शन संसद परिसर के इतने करीब पहुंच सका। प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने संसद भवन के प्रवेश द्वार बंद कर दिए और पूरे इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी।
लाठीचार्ज और आंसू गैस से रोका गया आगे बढ़ता प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए रेल भवन और कृषि भवन के आसपास सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। प्रेस क्लब, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब और रिजर्व बैंक के आसपास भी प्रदर्शनकारियों को रोकने के प्रयास किए गए। घटनास्थल के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा हुए, जिनमें लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। हालात पर नजर रखने के लिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार नियंत्रण कक्ष से निगरानी करते रहे।
संसद सत्र के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
यह घटनाक्रम संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ सामने आया। सदन में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। संसद परिसर के बाहर चल रहे प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया, जबकि सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र में सतर्क रहीं।
अभिजीत दीपके ने समाप्त किया अनशन
आंदोलन के दौरान सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। बताया गया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की ओर से मिले संदेश के बाद यह निर्णय लिया गया। आंदोलन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ शर्तों के आधार पर अनशन समाप्त किया गया, जबकि आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर संगठन अपनी रणनीति पर कायम है।
सरकार के सामने रखी गईं तीन प्रमुख मांगें
सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच वार्ता भी शुरू हुई। सीजेपी के प्रतिनिधि सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर संगठन की तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और कथित नीट पेपर लीक प्रकरण से जुड़े मृतक अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग शामिल रही। प्रतिनिधियों ने मुलाकात के बाद बताया कि सरकार ने इन मांगों पर आंतरिक स्तर पर विचार करने का भरोसा दिया है।




