नमो हरित-नगर योजना: 100 करोड़ से बदलेंगे MP के शहर, बनेंगे ऑक्सीजन पार्क और नगर वन
मध्यप्रदेश में नमो हरित-नगर योजना के तहत 100 करोड़ रुपये से शहरों में पार्क, नगर वन और हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। हाईटेक मॉनिटरिंग, जनभागीदारी और वैज्ञानिक पौधरोपण के जरिए शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
भोपाल. मध्यप्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने के लिए नमो हरित-नगर योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग आगामी पांच वर्षों तक इस योजना का संचालन करेगा, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। योजना का उद्देश्य शहरों में खाली पड़ी भूमि को हरित क्षेत्रों में बदलना, नए पार्क विकसित करना और आधुनिक सुविधाओं से युक्त नगर वन तैयार करना है, ताकि नागरिकों को स्वच्छ और बेहतर पर्यावरण मिल सके।
हाईटेक तकनीक से होगी पौधों की निगरानी
योजना के तहत लगाए जाने वाले प्रत्येक पौधे की सुरक्षा और विकास पर आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नजर रखी जाएगी। इसके लिए क्यूआर कोड, जीआईएस मैपिंग और जियो-टैगिंग जैसी डिजिटल प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार पौधों का चयन किया जाएगा। वर्षा जल संचयन, पुराने वृक्षों का संरक्षण और जल स्रोतों के आसपास पौधरोपण को विशेष प्राथमिकता देकर पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने की तैयारी की गई है।
थीम आधारित नगर वन बनेंगे आकर्षण का केंद्र
योजना के अंतर्गत शहरों में केवल हरियाली ही नहीं बढ़ाई जाएगी, बल्कि नागरिकों को प्रकृति के करीब लाने के लिए थीम आधारित नगर वन भी विकसित किए जाएंगे। इनमें पंचवटी, नक्षत्र वन, औषधि वाटिका, ऑक्सीजन पार्क, तितली पार्क और योग-वेलनेस पार्क जैसी अवधारणाओं को शामिल किया गया है। इन स्थलों का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों को स्वास्थ्य और प्राकृतिक वातावरण का बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना है।
जनभागीदारी मॉडल से मिलेगा विकास को सहयोग
नमो हरित-नगर योजना में 50:50 जनभागीदारी मॉडल अपनाया गया है। सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली राशि के बराबर सहयोग नगर निकायों को जनसहभागिता, स्वयं सहायता समूहों, गैर-सरकारी संगठनों और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से जुटाना होगा। इस व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और हरित परियोजनाओं को व्यापक सहयोग मिलेगा।
नगर निकायों को चरणबद्ध मिलेगी वित्तीय सहायता
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार तीन चरणों में वित्तीय सहायता जारी करेगी। प्रदेश के पांच प्रमुख नगर निगमों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन—को अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का अनुदान मिलेगा। इसके अलावा अन्य नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को उनकी श्रेणी के अनुसार अलग-अलग वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के कुल बजट का तीन प्रतिशत हिस्सा प्रशासनिक व्यवस्था और जनजागरूकता गतिविधियों पर व्यय किया जाएगा।
भोपाल की पहाड़ियों का होगा हरित विकास
अमृत हरित महाअभियान के तहत भोपाल में योजना का क्रियान्वयन शुरू हो चुका है। चिनार पार्क से भदभदा गेट तक स्थित बंजर पहाड़ियों को विकसित कर सार्वजनिक पार्क का स्वरूप दिया जाएगा। इन क्षेत्रों में वॉकिंग ट्रैक, नेचर ट्रेल और नागरिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे यह स्थान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों के लिए मनोरंजन और स्वास्थ्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सके। यह पहल भविष्य में शहरी प्रदूषण कम करने और हरित वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।




