मुरैना में बारिश के बाद खुली नगर निगम की पोल: सड़कों पर उतरे कमिश्नर, बैकफुट पर आईं महापौर
मुरैना में बारिश के बाद चोक नालियों और जलभराव से लोग परेशान हैं। व्यवस्थाएं सुधारने के लिए नगर निगम आयुक्त सड़कों पर उतरे, जिससे राजनीति तेज हो गई है।
मुरैना. बरसात की शुरुआत होते ही मुरैना शहर की टूटी सड़कें, चोक नाले और सड़कों पर बहता पानी आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। मानसून से पहले जिन बुनियादी तैयारियों को पूरा किया जाना चाहिए था, उन्हें नजरअंदाज करने का खामियाजा अब नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। इस पूरी स्थिति के बीच नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस समय शहर के प्रथम नागरिक को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए नालों और सड़कों का जायजा लेना चाहिए था, उस समय प्राथमिकताएं किसी और दिशा में थीं। अब जब नगर निगम आयुक्त सतेंद्र धाकरे खुद वार्डों में उतरकर बिगड़े हालात संभालने की कोशिश में लगे हैं, तो इस प्रशासनिक कवायद पर राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ मच गई है।
वार्ड-1 मुड़ियाखेड़ा में जलभराव की शिकायत पर पहुंचे निगम आयुक्त
गुरुवार को प्रशासनिक सक्रियता दिखाते हुए निगम आयुक्त ने वार्ड क्रमांक-1 मुड़ियाखेड़ा का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय पार्षद मधु हरिओम राजोरिया ने नालियों के पूरी तरह चोक होने और बारिश के पानी के सड़कों पर जमा होने की समस्या सामने रखी। गलियों में पानी भर जाने से नागरिकों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। स्थिति को भांपते हुए आयुक्त ने मौके पर मौजूद प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी जगदीश टैगोर को अविलंब नालियों की सफाई कराने के कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सफाई व्यवस्था में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नागरिकों से भी गीला व सूखा कचरा अलग-अलग वाहनों में देने का आग्रह किया।
सभी वार्डों में विशेष सफाई अभियान और अधिकारियों की जवाबदेही तय
निगम आयुक्त ने शहर के सभी वार्डों में तुरंत विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। प्रशासनिक कड़ाई का संदेश देते हुए आयुक्त ने कहा कि वे खुद रोजाना विभिन्न वार्डों का औचक निरीक्षण करेंगे। जिस भी क्षेत्र में नालियों की सफाई या कचरा प्रबंधन में ढिलाई पाई जाएगी, वहां संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
महापौर का क्रिकेट प्रेम और 6 महीने पुराने पत्र पर छिड़ा विवाद
शहर भर में इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि जिन समस्याओं का समाधान बारिश से पहले हो जाना चाहिए था, वे अब गंभीर रूप ले चुकी हैं। इस बीच महापौर शारदा सोलंकी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को खेल से जोड़ने के लिए किया गया था। उन्होंने दावा किया कि वे शहर की सफाई व्यवस्था और नालों की स्थिति को लेकर छह महीने पहले ही लिखित पत्र भेज चुकी थीं, जिस पर कोई अमल नहीं हुआ। हालांकि इस बयान के बाद यह सवाल गहरा गया है कि यदि पत्रों पर कार्रवाई नहीं हो रही थी, तो शहर की प्रथम नागरिक होने के नाते उन्होंने इस मामले को जिला प्रशासन, कलेक्टर या शासन के समक्ष मजबूती से क्यों नहीं उठाया।




