योजनाएं बनाना काफी नहीं, धरातल पर हो काम: आवारा पशुओं के प्रबंधन पर हाईकोर्ट की सरकार को फटकार
छत्तीसगढ़ और दिल्ली हाईकोर्ट ने आवारा कुत्तों और मवेशियों के खतरे पर कड़ा रुख अपनाया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 22 सितंबर तक प्रगति रिपोर्ट मांगी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर नगर निगम और सरकार को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। सड़कों पर हादसों और रेबीज के बढ़ते खतरे को देखते हुए अदालतों ने सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश जारी किए हैं।
रायपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में आवारा कुत्तों के काटने से बढ़ रहे रेबीज के खतरे और राजमार्गों पर घूमते आवारा मवेशियों की समस्या पर गहरा असंतोष जताया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह केवल कागजी योजनाएं बनाने तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन और सतत निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और एबीसी नियमों के पालन पर जोर
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव की ओर से शपथपत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें एनिमल वेलफेयर बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट की मानक संचालन प्रक्रिया के तहत उठाए गए कदमों का ब्योरा दिया गया। अदालत ने सरकार के प्रयासों को दर्ज तो किया, लेकिन कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा के मामले में ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। सभी जिलों में नियमित समीक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्य सचिव को 22 सितंबर तक अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा रुख और अवमानना की चेतावनी
दूसरी ओर, दिल्ली हाईकोर्ट ने भी राजधानी में आवारा कुत्तों और बंदरों के बढ़ते आतंक का स्वतः संज्ञान लिया है। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, नगर निगम और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दिल्ली सरकार से सवाल किया है कि नसबंदी, टीकाकरण और डॉग शेल्टर बनाने की दिशा में क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों से आवारा पशुओं को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
पशु प्रेमियों और आम नागरिकों के बीच संतुलन आवश्यक
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि समाज में एक तरफ पशु प्रेमी हैं और दूसरी तरफ आवारा पशुओं की समस्या से पीड़ित आम नागरिक। दोनों पक्षों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है, लेकिन रोजाना हो रही डॉग बाइट की घटनाएं चिंताजनक हैं। हाईकोर्ट परिसर में भी आवारा कुत्तों की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए बेंच ने कहा कि अस्पतालों, स्कूलों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसी जगहों को सुरक्षित बनाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई में सरकार द्वारा पेश की जाने वाली रिपोर्ट का परीक्षण किया जाएगा।




