सोने-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट, निवेशकों की बढ़ी सतर्कता
भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की सतर्कता के बीच दोनों कीमती धातुओं के वायदा भाव दबाव में रहे।

नई दिल्ली. भारतीय सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार की शुरुआत से ही सोने के वायदा भाव दबाव में दिखाई दिए। बाजार में निवेशकों की सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं का असर घरेलू कारोबार पर भी देखने को मिला। कारोबार के दौरान सोना करीब 0.39 प्रतिशत कमजोर होकर 1,41,301 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।
चांदी भी दबाव में, 2.20 लाख रुपये के नीचे पहुंचा भाव
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट का रुख बना रहा। औद्योगिक मांग में नरमी और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के चलते चांदी के वायदा भाव 0.44 प्रतिशत फिसलकर 2,19,650 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गए। इस गिरावट के बाद चांदी का भाव 2.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे पहुंच गया, जिससे बाजार में मंदी का माहौल और गहरा गया।
वैश्विक घटनाक्रम का दिखा असर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता का असर कीमती धातुओं के कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है। निवेशक फिलहाल बड़े निवेश से बचते नजर आ रहे हैं, जिससे बाजार में खरीदारी की रफ्तार धीमी बनी हुई है। डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली जैसी परिस्थितियों ने भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है। हालांकि कुछ आर्थिक संकेतकों में नरमी देखने को मिली है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की भविष्य की नीतियों को लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है। यही वजह है कि कीमती धातुओं में फिलहाल उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और निवेशक परिस्थितियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
बाजार में फिलहाल सतर्कता का माहौल
विश्लेषकों का कहना है कि जब तक वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में स्पष्टता नहीं आती, तब तक सोने और चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशक बड़े सौदों के बजाय सीमित और सोच-समझकर निवेश करने की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे सर्राफा बाजार में फिलहाल सुस्ती का माहौल बना हुआ है।




