चंद्रयान के बाद नई छलांग: गगनयान और स्पेस स्टेशन की तैयारी तेज, ऑस्ट्रेलिया के साथ बढ़ी रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर कहा कि चंद्रयान के बाद भारत अब गगनयान मिशन और अपने स्पेस स्टेशन की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया गगनयान मिशन, यूरेनियम और रक्षा सहयोग में भारत का साथ देगा।
मेलबर्न. चंद्रयान मिशन की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारत अब अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान कहा कि भारत केवल चंद्रमा तक पहुंचने पर नहीं रुकेगा, बल्कि अब गगनयान मिशन, स्वदेशी स्पेस स्टेशन और अंतरिक्ष तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मेलबर्न में आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत के अंतरिक्ष, नवाचार और आर्थिक विकास का विजन साझा किया।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच हुई वार्ता में रक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक और निवेश समेत 18 महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी।
‘ग्रो मोर, अचीव मोर’ के विजन पर आगे बढ़ रहा भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया का कोई भी देश चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने में सफल नहीं हुआ था, लेकिन भारत ने यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य इससे भी आगे का है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ‘ग्रो मोर, अचीव मोर’ के मंत्र के साथ इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने वाले गगनयान मिशन और अपने स्वयं के स्पेस स्टेशन के निर्माण पर तेजी से काम कर रहा है।
स्पेस स्टेशन बनाने वाले चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होगा भारत
गगनयान मिशन की सफलता भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में पहुंचा सकती है, जिनके पास अपना स्वतंत्र स्पेस स्टेशन है। फिलहाल इस सूची में रूस, अमेरिका और चीन शामिल हैं। भारत इस उपलब्धि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
स्टार्टअप और इनोवेशन में भारत की तेज रफ्तार
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। देश में 2 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं और हर महीने करीब 4,000 नए स्टार्टअप जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि रक्षा और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है, जिससे सैकड़ों स्टार्टअप इन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट होगा लॉन्च
भारतीय स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस जल्द ही अपना ‘विक्रम-1’ ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी में है। वहीं वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए देशभर में 10 हजार से अधिक अटल टिंकरिंग लैब संचालित की जा रही हैं।
गगनयान मिशन में ऑस्ट्रेलिया करेगा सहयोग
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंतरिक्ष सहयोग को नई मजबूती मिली है। गगनयान मिशन की मॉनिटरिंग और टेलीमेट्री ट्रैकिंग के लिए ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप समूह में अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा।
इसके अलावा दोनों देशों ने नया जॉइंट डिक्लेरेशन और इंडिया-ऑस्ट्रेलिया डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर शुरू करने पर भी सहमति जताई, जिससे रक्षा उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ेगा।
यूरेनियम, क्लीन एनर्जी और हाई-टेक साझेदारी पर जोर
2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऑस्ट्रेलिया भारत को शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु कार्यक्रमों के तहत यूरेनियम निर्यात करेगा।
दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए PACTS समझौते पर भी सहमति जताई। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया।
ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत में निवेश का न्योता
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि पोर्ट, एयरपोर्ट, रेलवे, हाईवे, शहरी विकास और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक निवेश की अपार संभावनाएं हैं। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।




