‘ये तो आपको झेलना ही पड़ेगा…’ BJP सांसद राघव चड्ढा को दिल्ली HC से बड़ा झटका, सोशल मीडिया पोस्ट हटाने से इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने बीजेपी सांसद राघव चड्ढा को बड़ा झटका देते हुए उनके खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट हटाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि नेताओं को व्यंग्य झेलना सीखना होगा। पूरी खबर पढ़ें।
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन छोड़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चल रहे व्यंग्यात्मक (Sarcastic) पोस्ट और मीम्स को हटाने का आदेश देने से साफ इनकार कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने राजनेताओं को नसीहत दी कि सार्वजनिक जीवन में बैठे लोगों को व्यंग्यात्मक मजाक को अपने पेशे का एक जरूरी और अपरिहार्य हिस्सा मानना चाहिए और इसे झेलने की आदत डालनी चाहिए।
52 में से सिर्फ 5 पोस्ट हटाने का आदेश, कोर्ट बोला- ‘बाकी मानहानिकारक नहीं’
राघव चड्ढा ने बीजेपी में शामिल होने के बाद अपने ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ की सुरक्षा और सोशल मीडिया पर मानहानि करने वाले कंटेंट को हटाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कोर्ट से 52 ऐसे लिंक्स और डॉक्यूमेंट्स को हटाने की मांग की थी, जो उनके मुताबिक उनकी छवि खराब कर रहे थे। हालांकि, कोर्ट ने इनमें से सिर्फ 5 डॉक्यूमेंट्स को ही हटाने का अंतरिम आदेश दिया, क्योंकि वे साफ तौर पर अश्लील और भद्दे थे। बाकी 47 लिंक्स पर रोक लगाने से मना करते हुए जज ने कहा, “कंटेंट अपने-आप आपत्तिजनक या मानहानिकारक नहीं हो जाता।”
आजादी के बाद से हम आरके लक्ष्मण के कार्टून देखते बड़े हुए हैं
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने राजनीतिक आलोचना और सोशल मीडिया के दौर पर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “राजनीतिक क्षेत्र में आपके (राघव चड्ढा) द्वारा लिए गए फैसले की आलोचना की जा रही है। आजादी के बाद से ही हम आरके लक्ष्मण के कार्टून देखते हुए बड़े हुए हैं, जिनमें राजनीतिक फैसलों की तीखी आलोचना होती थी। अंतर बस इतना है कि उस समय सोशल मीडिया नहीं था, और अब यह बहुत ज्यादा फैल गया है।”
कोर्ट ने चड्ढा के वकीलों से सीधा सवाल किया, “एक राजनीतिक नेता के तौर पर, क्या आप इतने संवेदनशील हो सकते हैं?”
AI वीडियो में साड़ी पहने दिखे चड्ढा, वकीलों ने दी दलील
राघव चड्ढा के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी थी कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ AI-जनरेटेड डीपफेक, मॉर्फ्ड विजुअल्स और भ्रामक डिजिटल कंटेंट फैलाया जा रहा है। कोर्ट को बताया गया कि कई एडिटेड वीडियो और तस्वीरों में राघव चड्ढा को साड़ी पहने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन पर पैसे बरसाते हुए दिखाया गया है। वकीलों का तर्क था कि इस कंटेंट का सीधा मतलब यह निकालना है कि उन्होंने पैसे के लिए खुद को बेच दिया, जो कि पूरी तरह मानहानिकारक है। हालांकि, कोर्ट ने इस पर कोई भी अंतरिम रोक लगाने से साफ मना कर दिया।




