छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति को केंद्र में मिली बड़ी जिम्मेदारी
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी पार्क योजना की स्टीयरिंग सह प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग समिति में सदस्य नियुक्त किया है। यह समिति देश भर में बनने वाले बायोटेक पार्कों की निगरानी और वित्तीय मंजूरियों का काम देखेगी। इस नियुक्ति से छत्तीसगढ़ के कृषि और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर नया मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे नवाचार और नए स्टार्टअप्स को तेजी से बढ़ावा मिलने की संभावना है।
रायपुर. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एक अहम समिति में शामिल किया गया है। उन्हें राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी पार्क योजना की स्टीयरिंग सह प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग समिति का सदस्य नियुक्त करने संबंधी आधिकारिक निर्देश मंत्रालय की तरफ से जारी कर दिए गए हैं। इस नियुक्ति के बाद प्रदेश के शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
देश में बायोटेक उद्योगों को प्रोत्साहन
केंद्र सरकार की इस विशेष योजना का मुख्य उद्देश्य देश भर में जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े उद्योगों और नए स्टार्टअप्स को मजबूती प्रदान करना है। इसके अंतर्गत अलग-अलग राज्यों में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त बायोटेक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इन पार्कों के निर्माण में राज्य सरकारों का सहयोग लिया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से इसके लिए जरूरी वित्तीय सहायता मुहैया कराई जा रही है।
परियोजनाओं की स्वीकृति और निगरानी का कार्य
राष्ट्रीय स्तर पर बनाई गई यह शक्तिशाली समिति विभिन्न राज्यों से आने वाले बायोटेक पार्क प्रस्तावों और प्रोजेक्ट रिपोर्ट की समीक्षा करके उन्हें अंतिम मंजूरी देने का काम करेगी। इसके साथ ही, यह समिति पार्कों के निर्माण की गति, गुणवत्ता और उनके सही क्रियान्वयन पर लगातार नजर रखेगी। जैव प्रौद्योगिकी पार्कों को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देना और आपसी समन्वय स्थापित करना भी इसी समिति के अधिकार क्षेत्र में आएगा।
छत्तीसगढ़ के कृषि और नवाचार क्षेत्र को लाभ
डॉ. गिरीश चंदेल के इस राष्ट्रीय मंच पर पहुंचने से छत्तीसगढ़ के कृषि, बायो-टेक्नोलॉजी और नए अनुसंधानों को देश के शीर्ष स्तर पर मजबूत प्रतिनिधित्व मिला है। उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और लंबे प्रशासनिक अनुभव का लाभ देश भर में चल रही जैव प्रौद्योगिकी योजनाओं को मिलेगा। इससे न केवल अनुसंधान गतिविधियों में तेजी आएगी, बल्कि युवाओं को बायोटेक आधारित नए व्यवसाय और स्टार्टअप शुरू करने के बेहतर अवसर भी प्राप्त होंगे।




