मध्य प्रदेश

भोजशाला विवाद में नया मोड़, नमाज के वैकल्पिक स्थान को लेकर तेज हुई चर्चा

धार स्थित भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद नमाज के वैकल्पिक स्थान, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। आदेश के अध्ययन के बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

धार. मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश के बाद प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। अदालत ने मस्जिद पक्ष के लिए शुक्रवार की नमाज हेतु परिसर के पास वैकल्पिक खुली जगह उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके बाद सबसे बड़ा प्रश्न उपयुक्त स्थान के चयन का बन गया है। मंदिर पक्ष का कहना है कि भोजशाला के 300 मीटर के संरक्षित क्षेत्र के भीतर किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा, जबकि इस सीमा से बाहर स्थान उपलब्ध होने पर उन्हें आपत्ति नहीं है।

आदेश की प्रति मिलने के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

जिला प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने और उसका विस्तृत अध्ययन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर राजस्व, पुलिस और अन्य विभागों की संयुक्त टीम क्षेत्र का निरीक्षण कर संभावित विकल्पों का आकलन करेगी। फिलहाल किसी स्थान को लेकर आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।

एक परिसर में धार्मिक गतिविधियों का संचालन सबसे बड़ी चुनौती

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय के अनुसार भोजशाला में हिंदू पक्ष को पूरे वर्ष पूजा-अर्चना का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में यदि अदालत के निर्देशों के अनुरूप नमाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी होती है तो सुरक्षा, आवाजाही, प्रवेश-निकास और दोनों समुदायों की गतिविधियों के समन्वय जैसी कई प्रशासनिक चुनौतियां सामने रहेंगी। विशेष रूप से परिसर में मौजूद एकमात्र मुख्य प्रवेश द्वार व्यवस्था को और संवेदनशील बनाता है।

मंदिर और मुस्लिम पक्ष ने रखे अपने-अपने सुझाव

मंदिर पक्ष से जुड़े प्रतिनिधियों ने दावा किया कि अतीत में नमाज के लिए अलग भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है और आज भी वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद मस्जिद कमेटी और समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उनका कहना है कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप प्रशासन से समन्वय कर समाधान तलाशा जाएगा।

13 बीघा भूमि भी बनी चर्चा का विषय

राजस्व अभिलेखों में भोजशाला के आसपास कुछ भूमि मुस्लिम संस्थाओं के नाम दर्ज होने की चर्चा के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन इन्हीं स्थानों में से किसी को विकल्प के रूप में देखेगा या फिर किसी अन्य स्थान का चयन किया जाएगा। हालांकि इस संबंध में प्रशासन ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।

पहले भी अपनाई जा चुकी हैं विशेष व्यवस्थाएं

भोजशाला परिसर में बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने पर पहले भी कई बार विशेष व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। वर्ष 2006, 2013 और जनवरी 2026 में प्रशासन ने अलग-अलग प्रवेश मार्ग, बैरिकेडिंग और अस्थायी व्यवस्थाओं के जरिए दोनों समुदायों के धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए थे। इन अनुभवों को देखते हुए इस बार भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार किए जाने की संभावना है।

अंतरिम आदेश के बाद बढ़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी

चूंकि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है, इसलिए प्रशासन के सामने अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। वैकल्पिक स्थान का चयन, सुरक्षा प्रबंधन, श्रद्धालुओं और नमाजियों की आवाजाही तथा संवेदनशील परिस्थितियों में समन्वय बनाए रखना आने वाले समय में प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।

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