बस्तर शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल: एक महीने में 3 शिक्षक देने के भरोसे पर खुला प्राथमिक स्कूल का ताला
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों ने स्कूल में ताला जड़ दिया। अधिकारियों द्वारा 3 शिक्षक देने के आश्वासन के बाद खुला ताला। जानें पूरी रिपोर्ट।
बस्तर. छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। संकुल देवड़ा के बड़े अलनार प्राथमिक स्कूल में ग्रामीणों द्वारा जड़ा गया ताला शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद आखिरकार खुल गया है। विभाग ने एक महीने के भीतर तीन शिक्षकों की स्थाई व्यवस्था करने का भरोसा दिया है, जिसके बाद शनिवार से स्कूल में पढ़ाई दोबारा शुरू हो सकी।
91 बच्चों पर सिर्फ एक शिक्षक, पास के स्कूल से किया गया अटैच
खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) भारती देवांगन ने बताया कि अस्थाई व्यवस्था के तौर पर फिलहाल पास के एक मिडिल स्कूल से एक शिक्षक को इस प्राथमिक स्कूल में अटैच किया गया है। ग्रामीणों का तर्क था कि 91 छात्र संख्या वाले स्कूल में केवल एक शिक्षक के भरोसे गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई मुमकिन नहीं है, क्योंकि शिक्षक को अध्यापन के साथ-साथ विभागीय कागजी और प्रशासनिक काम भी देखने पड़ते हैं।
जिले के 298 स्कूल ‘एकल शिक्षक’ के भरोसे, नींव हो रही कमजोर
बड़े अलनार का ताला तो खुल गया है, लेकिन इसने जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को उजागर कर दिया है। बस्तर जिले में कुल 1513 प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 298 स्कूल सालों से सिर्फ एक ही शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। इन स्कूलों में पहली से पांचवीं तक की पांच अलग-अलग कक्षाएं, मध्याह्न भोजन की निगरानी और दाखिले की जिम्मेदारी एक ही शिक्षक पर है। शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे बच्चों की शुरुआती भाषाई और गणितीय नींव कमजोर हो रही है। जिले के अमड़ागुड़ा में 78 और उलनार प्राथमिक स्कूल में 75 बच्चों पर भी केवल एक शिक्षक तैनात है।
शासन स्तर पर भेजा गया है प्रस्ताव
DEO शिक्षकों की इस कमी पर बस्तर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बीआर बघेल ने स्पष्ट किया कि नई नियुक्तियां और भर्ती सीधे राज्य शासन के स्तर से होती हैं। विभाग ने अधिक छात्र संख्या और कम शिक्षकों वाले स्कूलों की एक विस्तृत सूची तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। शासन से नई नियुक्तियां होते ही इस समस्या का स्थाई समाधान कर लिया जाएगा।




