अयोध्या राम मंदिर से गायब हुई 5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस? ट्रस्ट ने तस्वीरें जारी कर दिया ये जवाब
अयोध्या राम मंदिर से 5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस गायब होने के आरोपों पर राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने तस्वीरें जारी कर सफाई दी है। जानिए कहाँ रखी है यह स्वर्ण पुस्तक।
अयोध्या. अयोध्या के राम मंदिर से पांच करोड़ रुपये की सोने की रामचरितमानस गायब होने के आरोपों को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। ट्रस्ट ने दावा किया है कि यह अमूल्य धरोहर पूरी तरह सुरक्षित है और रविवार को सबूत के तौर पर इसकी तस्वीरें भी जारी की गईं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व आईएएस अधिकारी और केंद्र सरकार में गृह सचिव रहे एस. लक्ष्मी नारायण ने शनिवार को मंदिर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि रामलला को भेंट की गई स्वर्ण रामचरितमानस मंदिर से गायब है और इस बारे में पूछने पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से उन्हें कोई सही जवाब नहीं मिला।
गर्भ गृह से कोठार में शिफ्ट की गई स्वर्ण रामचरितमानस
ट्रस्ट ने रविवार को बयान जारी कर सफाई दी कि पूर्व आईएएस द्वारा भेंट की गई सोने की श्री रामचरितमानस कुछ दिनों तक मंदिर के गर्भ गृह के पास रखी गई थी। इसके बाद सुरक्षा कारणों से उसे परिसर के अंदर ही बने सुरक्षित कोठार (स्ट्रॉन्ग रूम) में रखवा दिया गया है। ट्रस्ट ने कहा कि पूर्व आईएएस अधिकारी जब चाहें खुद आकर इसे देख सकते हैं।
पूर्व आईएएस का आरोप: मां के गहने गलाकर बनाई, न रसीद मिली न सम्मान
एस. लक्ष्मी नारायण ने बताया कि उन्होंने अपनी दिवंगत मां की इच्छा पूरी करने के लिए अपने जीवन भर की कमाई और मां के गहनों को गलवाकर यह स्वर्ण रामचरितमानस तैयार करवाई थी। इसे उन्होंने 8 अप्रैल 2024 को रामनवमी से पहले ट्रस्ट को सौंपा था। उनका आरोप है कि समर्पण के बाद न तो उन्हें कोई रसीद दी गई और न ही बाद में इसके बारे में कोई जानकारी साझा की गई। तीन-चार महीने बाद जब उन्हें इसके गायब होने की भनक लगी, तो उन्होंने 10-12 पत्र लिखे और चंपत राय से मिलने की कोशिश की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने चंपत राय पर 9 घंटे इंतजार कराने और अपमानजनक व्यवहार करने का भी आरोप लगाया।
मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि में सुरक्षित है स्वर्ण गीता
राम मंदिर ट्रस्ट के रवैये से आहत पूर्व गृह सचिव ने मथुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी श्रीमद्भगवद्गीता की एक स्वर्ण प्रति भेंट की थी। वहां के सचिव कपिल शर्मा ने न सिर्फ उन्हें विधिवत रसीद दी, बल्कि आज भी वहां रोजाना उसकी पूजा होती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी मथुरा जाकर उस स्वर्ण गीता के दर्शन किए थे।



