उत्तर प्रदेशराज्य

राम मंदिर चंदे पर PMO सख्त! जब मांगा पाई-पाई का हिसाब, तो ट्रस्ट ने क्यों किया इनकार?

अयोध्या राम मंदिर चंदा और चढ़ावा चोरी मामले में नया मोड़! PMO की सख्ती के बाद जब जिला प्रशासन ने ट्रस्ट से वित्तीय लेनदेन का हिसाब मांगा, तो ट्रस्ट ने SIT जांच का हवाला देकर जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। पढ़ें पूरी खबर।

अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित हेराफेरी व चोरी का मामला अब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की दहलीज तक पहुंच गया है। इस पूरे विवाद में एक नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पीएमओ के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा मांगी गई वित्तीय जानकारियों को देने से साफ इनकार कर दिया है। ट्रस्ट ने इसके पीछे वर्तमान में चल रही एसआईटी (SIT) जांच का हवाला दिया है।

बीजेपी नेता की शिकायत पर PMO ने लिया कड़ा संज्ञान

दरअसल, यह पूरा मामला तब गरमाया जब अयोध्या के स्थानीय बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, चंदे और जमीन खरीद-फरोख्त में गड़बड़ियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे पत्र लिखा था।

डॉ. रजनीश सिंह ने पीएमओ से मांग की थी कि मंदिर ट्रस्ट को अपनी शुरुआत से लेकर अब तक के सभी वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संपत्ति की जानकारी को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने इस संबंध में 9 जून और 12 जून को दो बार पत्र लिखे, जिसके ठीक बाद 13 जून को मामले की जांच के लिए SIT गठित कर दी गई थी।

प्रशासन ने मांगा ब्योरा, चंपत राय ने खड़े किए हाथ

बीजेपी नेता की गंभीर शिकायत का संज्ञान लेते हुए पीएमओ ने इस मामले को अयोध्या जिला प्रशासन को रेफर किया था। सूत्रों के मुताबिक, 23 जून को अयोध्या के एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को पत्र लिखकर सूचित किया कि उन्होंने पीएमओ की शिकायत के आधार पर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से संपर्क किया था।

जब प्रशासन ने ट्रस्ट से आय-व्यय और संपत्ति का ब्योरा मांगा, तो चंपत राय ने यह कहकर जानकारी देने से मना कर दिया कि फिलहाल मामले की SIT जांच चल रही है। जांच पैनल सभी जरूरी रिकॉर्ड इकट्ठा कर रहा है, इसलिए अभी यह जानकारियां साझा नहीं की जा सकतीं।

इन बड़े वित्तीय रहस्यों पर टिकी हैं सबकी नजरें

पीएमओ को भेजी गई शिकायत में मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है, जिन्हें देने से फिलहाल ट्रस्ट पीछे हट रहा है:

  • ‘समर्पण निधि’ अभियान: देशव्यापी अभियान के जरिए इकट्ठा किया गया कुल कोष।
  • दान और चढ़ावा: अलग-अलग माध्यमों से मिला कैश और बैंक ट्रांजैक्शन।
  • सोना-चांदी: रामलला को अर्पण किए गए सोने, चांदी और कीमती गहनों का विवरण।
  • जमीन का लेन-देन: ट्रस्ट द्वारा अब तक खरीदी और बेची गई जमीनों के सौदे।
  • ऑडिट रिपोर्ट: मंदिर निर्माण, प्रशासन पर हुआ खर्च और अब तक की निरीक्षण रिपोर्ट।

INE Desk

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