राजनीतिक

‘कागजी शेर’ बन गए हैं CM? गृहमंत्री अमित शाह और नागा विधायकों की मीटिंग पर मणिपुर में सियासी भूचाल

मणिपुर संकट के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और नागा विधायकों की बैठक पर कांग्रेस ने तीखे सवाल उठाए हैं। जानिए कांग्रेस ने सीएम को 'कागजी शेर' क्यों कहा।

इम्फाल: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को मणिपुर के नागा समुदाय के विधायकों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो भी मौजूद थे। लेकिन, इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद मणिपुर की सियासत में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस की मणिपुर इकाई ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि आखिर विधायकों और गृहमंत्री की इस महत्वपूर्ण बैठक से मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह गायब क्यों थे?

कांग्रेस ने सवाल दागा कि आखिर मणिपुर के नागा विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के बीच इतनी बड़ी बैठक राज्य के मुख्यमंत्री के बिना कैसे आयोजित की जा सकती है?

‘सीएम को अलग रखना पद की गरिमा का अपमान’

इस बैठक के ठीक बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मणिपुर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस विधायक दल के नेता केशम मेघचंद्र सिंह ने कहा कि इस बैठक के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

कांग्रेस नेता मेघचंद्र सिंह ने आरोप लगाया विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के बीच की बैठक से मुख्यमंत्री को अलग रखना यह पद की गरिमा और उनके अधिकारों को कमतर आंकना है। यह दिखाता है कि राज्य सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।

इसके साथ ही उन्होंने विधायकों के साथ केंद्रीय गृहमंत्री से मिलने पहुंचे उप मुख्यमंत्री लोसी दीखो की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

‘विधायकों को अपने ही मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं’

सपा प्रमुख की तर्ज पर मणिपुर कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर तीखा रुख अपनाया है। मेघचंद्र ने कहा, “यह बैठक साफ दर्शाती है कि उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो और नागा विधायकों को अपने ही मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं रह गया है। इसीलिए वे मुख्यमंत्री को बाईपास करके सीधे केंद्रीय गृहमंत्री से मिलने पहुंच गए।”

इसके अलावा कांग्रेस ने बैठक में नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो की मौजूदगी को लेकर भी घेरा। कांग्रेस का कहना है कि राज्य का प्रशासन यहाँ के निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से होना चाहिए, न कि किसी पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री के इशारे पर। आखिर मणिपुर के विधायकों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नागालैंड के सीएम ने क्यों किया?

डिप्टी सीएम पर कटाक्ष और मुख्यमंत्री को बताया ‘कागजी शेर’

कांग्रेस ने दूसरे उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को भी आड़े हाथों लिया।

कांग्रेस का आरोप राजनीतिक मायनों में इसका असर
डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन का संकट के समय दिल्ली में डटे रहना। यह दिखाता है कि उनकी प्राथमिकता मणिपुर की जनता नहीं, बल्कि केंद्र की राजनीति है।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह की बैठक से अनुपस्थिति। सीएम अब सिर्फ एक ‘कागजी शेर’ बनकर रह गए हैं, राज्य के शासन पर उनका प्रभाव खत्म हो चुका है।

BJP की चुप्पी: कांग्रेस की तरफ से उठाए गए इन तीखे और गंभीर सवालों पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) या सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

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