अंतरराष्ट्रीय

सुपरपावर शिफ्ट का संकेत? अमेरिकी हमले के बीच चीन का उभार, ताइवान अलर्ट

मादुरो की गिरफ्तारी से चीन को वेनेजुएला में बड़ा झटका लगा, लेकिन ट्रंप की मुनरो डॉक्ट्रिन नीति से बीजिंग को ताइवान पर दावा मजबूत करने का नया तर्क मिला।

नई दिल्ली. अमेरिकी फोर्सेज द्वारा वेनेजुएला की राजधानी में घुसकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा किए जाने की घटना ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी। खास बात यह रही कि इस कार्रवाई से कुछ ही घंटे पहले मादुरो की मुलाकात चीन के विशेष दूत से हुई थी। चीन के वेनेजुएला के साथ रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। अमेरिका के बाद चीन, वेनेजुएला का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है।

तेल और बाजार पर अमेरिकी नियंत्रण, चीन को बड़ा नुकसान

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला के तेल और बाजार पर अमेरिकी नियंत्रण से चीन को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने शर्त रखी है कि वेनेजुएला के बाजार में अमेरिकी उत्पादों की ही सप्लाई होगी। इससे चीन के हाथ से एक बड़ा और रणनीतिक बाजार निकल गया है।

मुनरो डॉक्ट्रिन और चीन की नई उम्मीद

हालांकि, इस मुश्किल में भी चीन के लिए एक नई संभावना उभरती दिख रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन जिस मुनरो डॉक्ट्रिन का हवाला देकर लैटिन अमेरिका पर अमेरिकी प्रभाव को सही ठहराता रहा है, उसी तर्क को आगे बढ़ाकर चीन ताइवान पर अपनी दावेदारी को और मजबूत कर सकता है।

19वीं सदी की मुनरो डॉक्ट्रिन का उल्लेख बीते वर्षों में ट्रंप प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में दोबारा किया गया था, जिसके तहत संसाधन-समृद्ध लैटिन अमेरिकी देशों पर प्रभाव बढ़ाने की बात कही गई।

‘अगर वेनेजुएला, तो ताइवान क्यों नहीं?’

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका वेनेजुएला पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है, तो चीन भी एकीकृत चीन और अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए ताइवान पर कदम बढ़ाने का तर्क दे सकता है।

ट्रंप प्रशासन की ओर से वेनेजुएला को लगातार चेतावनी दी जा रही थी कि वह चीन, ईरान, रूस और क्यूबा से अपने संबंध तोड़े, तभी उसे तेल उत्पादन की अनुमति दी जाएगी।

चीन के निवेश पर ट्रंप की आपत्ति

डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया था कि चीन वेनेजुएला में इतने बड़े पैमाने पर निवेश क्यों कर रहा है। इतना ही नहीं, ट्रंप प्रशासन ने ग्रीनलैंड तक पर दावेदारी जता दी, जिससे यूरोप में भी तनाव की स्थिति बनी। इन घटनाक्रमों ने चीन को यह संकेत दिया है कि वैश्विक शक्ति संतुलन में अब वह भी अधिक आक्रामक रुख अपनाने का दावा कर सकता है—खासतौर पर ताइवान के मुद्दे पर।

वैश्विक राजनीति का नया मोड़

वेनेजुएला से लेकर ताइवान तक की यह कड़ी बताती है कि एक क्षेत्रीय कार्रवाई कैसे वैश्विक भू-राजनीति को नई दिशा दे सकती है। आने वाले समय में अमेरिका–चीन टकराव का केंद्र सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय प्रभुत्व और सुरक्षा सिद्धांत भी बनते दिख रहे हैं।

INE Desk

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