छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर बड़ा आरोप: राजनांदगांव से केरल तक फैला नेटवर्क उजागर

राजनांदगांव में कथित मतांतरण नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा। 20 वर्षों में 2,000 से अधिक परिवार प्रभावित होने का आरोप, पुलिस जांच में फंडिंग और स्लीपर सेल की भूमिका की पड़ताल।

राजनांदगांव. जिला मुख्यालय से करीब नौ किलोमीटर दूर ग्राम धर्मापुर से संचालित एक कथित ईसाई मतांतरण नेटवर्क को लेकर पुलिस जांच में गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि इस नेटवर्क के प्रमुख डेविड चाको ने अपने कथित स्लीपर सेल ‘पाल’ के माध्यम से पिछले 20 वर्षों में राज्य के आदिवासी अंचलों में दो हजार से अधिक परिवारों का मतांतरण कराया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के ठिकानों से बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों की निजी जानकारी से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

जांच के साथ सामने आ रहीं चौंकाने वाली जानकारियां

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कई नई जानकारियां सामने आ रही हैं। आठ जनवरी को सुकुलदैहान पुलिस चौकी में अवैध आश्रम संचालन, नाबालिग आदिवासी बच्चों को बिना प्रशासनिक अनुमति के रखने और संदिग्ध गतिविधियों के आरोपों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। यह शिकायत हिंदू जागरण मंच के सुशील लड्ढा द्वारा की गई थी।

2006 से आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय रहने का आरोप

धर्मापुर में कथित तौर पर ‘रिहैबिलिटेशन सेंटर’ के नाम पर नेटवर्क संचालित करने वाला डेविड चाको वर्ष 2006 से छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय बताया जा रहा है। इसी अवधि में उसके इंडिया पेंटेकोस्टल चर्च से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है। आरोप है कि इन वर्षों में उसने सैकड़ों परिवारों के मतांतरण में भूमिका निभाई, जिसके चलते संगठन में उसका पद भी बढ़ता गया।

1998 में छत्तीसगढ़ आगमन, ठिकाने बदलता रहा

जांच में यह भी सामने आया है कि मूल रूप से केरल निवासी डेविड चाको 1998 में छत्तीसगढ़ आया था। इसके बाद वह विभिन्न स्थानों पर रहकर गतिविधियां संचालित करता रहा। पुलिस के अनुसार, 2006 से वह मुख्य रूप से राजनांदगांव क्षेत्र में रह रहा था, जबकि इससे पहले वह दल्ली राजहरा में भी लंबे समय तक रहा।

फ्रिज रिपेयरिंग से कथित संपत्ति तक का सफर

स्थानीय लोगों के अनुसार, राजनांदगांव आने के शुरुआती वर्षों में डेविड फ्रिज रिपेयरिंग का कार्य करता था। बाद के वर्षों में उसके पास कथित तौर पर लाखों रुपये की संपत्ति होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि वह हैदराबाद की एक संस्था से जुड़ा था और इसके बाद उसकी गतिविधियों का दायरा बढ़ा।

‘पाल’ नाम से कथित स्लीपर सेल की संरचना

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर ‘पाल’ कोडनेम से लोगों की भर्ती की, जो आदिवासी इलाकों में स्लीपर सेल की तरह कार्य करते थे। आरोप है कि ये लोग निर्धन, बीमार, अकेले परिवारों और अनाथों की पहचान कर योजनाबद्ध तरीके से मतांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते थे।

फंडिंग और प्रशिक्षण मॉड्यूल की जांच तेज

पिछले 23 दिनों से चल रही जांच में पुलिस को संदिग्ध प्रशिक्षण मॉड्यूल, पुस्तकें, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और यात्रा से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। फंडिंग को लेकर आरोपी के बयानों में कथित तौर पर विरोधाभास पाए गए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस मामले की गहन पड़ताल कर रही है।

पुलिस का पक्ष

पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने बताया कि आरोपी के पास से कई संदिग्ध दस्तावेज, प्रशिक्षण मॉड्यूल, किताबें और डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं। साथ ही उसकी पृष्ठभूमि, संपत्ति और फंडिंग से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं से पूछताछ जारी है।

INE Desk

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