राजनीतिक

TMC में इस्तीफों का सिलसिला तेज, राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने छोड़ा पद

तृणमूल कांग्रेस में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया, जबकि मदन मित्रा भी संगठनात्मक पदों से हटकर बागी गुट के साथ दिखाई दिए। लगातार हो रहे इस्तीफों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी उथल-पुथल के बीच राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री कोयल मलिक ने अपने पद से आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने कुछ समय पहले ही पद छोड़ने की मंशा जाहिर की थी और अब औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर दी है। उनके इस कदम को पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

कुछ ही महीनों में पद से हटने का फैसला

कोयल मलिक को इसी वर्ष अप्रैल में राज्यसभा के लिए नामित किया गया था, लेकिन कार्यकाल शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय ले लिया। इससे पहले भी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया था और बाद में अलग राजनीतिक राह चुनी। लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रमों ने पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

पार्टी में लगातार बढ़ रही राजनीतिक हलचल

विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर कई नेताओं के अलग रुख अपनाने की खबरें सामने आती रही हैं। कुछ नेताओं ने नए राजनीतिक समूहों का समर्थन किया, जबकि कुछ ने संगठन से दूरी बना ली। इन घटनाओं के बीच पार्टी के कई सांसदों और विधायकों के अलग-अलग गुटों के साथ सक्रिय होने की चर्चा ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और अधिक गर्मा दिया है।

मदन मित्रा ने संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा

इसी बीच वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा ने भी पार्टी की विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों के साथ-साथ विधानसभा में मुख्य सचेतक के पद से भी तत्काल प्रभाव से हटने का फैसला किया। इसके बाद वह नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ दिखाई दिए, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं।

‘कमरा बदला है, मकान नहीं’ बयान बना चर्चा का विषय

मदन मित्रा ने अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने केवल अपनी राजनीतिक भूमिका बदली है, पार्टी नहीं। उनका कहना था कि उन्होंने “कमरा बदला है, मकान नहीं”, यानी वह विधायक के रूप में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रहेंगे, लेकिन संगठनात्मक जिम्मेदारियां अब नहीं निभाएंगे। उनके इस बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले समय में पार्टी की रणनीति पर सबकी नजर बनी हुई है।

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