ईरान में उभर रहा नया पावर सेंटर, अली खुमैनी को मिला कट्टरपंथी गुट का समर्थन
ईरान में अली खुमैनी को कट्टरपंथी गुट का समर्थन मिलने से नई राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बदलते शक्ति समीकरण, क्षेत्रीय रणनीति और अमेरिका-ईरान तनाव के संभावित प्रभावों पर नजर बनी हुई है।
तेहरान. ईरान की राजनीति में इन दिनों नए शक्ति समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। मोजतबा खामेनेई को लेकर चल रही अटकलों के बीच अयातुल्ला खुमैनी के पोते अली खुमैनी को कट्टरपंथी माने जाने वाले इस्लामी फ्रंट (जबेह पायदारी) का समर्थन मिलने की खबर ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। माना जा रहा है कि इससे देश के सत्ता संतुलन और भविष्य की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका के साथ समझौते के खिलाफ सख्त रुख
अली खुमैनी ने हालिया संबोधन में अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार के समझौते का विरोध करते हुए कठोर रुख अपनाया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बयान के बाद कट्टरपंथी नेतृत्व के बीच उनकी स्वीकार्यता और मजबूत हुई है। साथ ही, उनके प्रभाव में वृद्धि को ईरान की आंतरिक राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
क्षेत्रीय रणनीति में बदलाव की संभावनाएं
बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ईरान खाड़ी क्षेत्र में अपनी रणनीतिक सक्रियता बढ़ा सकता है। विश्लेषणों के अनुसार, देश अपने क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत करने, सहयोगी संगठनों के साथ रिश्ते और गहरे करने तथा पश्चिम एशिया में अपनी भूमिका को विस्तार देने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। वहीं, सुधारवादी राजनीति के लिए चुनौतियां बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है।
होर्मुज को लेकर अमेरिका का नया बयान
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका सक्रिय रहेगा और जहाजों से सुरक्षा शुल्क के रूप में 20 प्रतिशत टोल वसूलने की नीति अपनाई जाएगी। उनका यह भी कहना है कि जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिए खुला रहेगा और वैश्विक व्यापार प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
तनाव बढ़ने से ऊर्जा बाजार पर असर
हाल के सैन्य घटनाक्रमों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। क्षेत्र में ड्रोन हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाई की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।




