जब पर्दे पर खलनायक बनकर छा गए प्राण, अभिनय से रच दिया हिंदी सिनेमा का स्वर्णिम इतिहास
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता प्राण ने खलनायक और चरित्र अभिनेता दोनों रूपों में अपनी अलग पहचान बनाई। करीब 350 फिल्मों में अभिनय कर उन्होंने भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।
हिंदी सिनेमा में प्राण का नाम उन कलाकारों में शामिल है, जिन्होंने खलनायक की भूमिका को नई ऊंचाई दी। प्रभावशाली संवाद, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और सशक्त अभिनय के दम पर उन्होंने दशकों तक दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी अदाकारी इतनी प्रभावशाली थी कि पर्दे पर निभाए गए नकारात्मक किरदार भी लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बने रहे।
पान की दुकान से शुरू हुआ फिल्मों का सफर
12 फरवरी 1920 को दिल्ली में जन्मे प्राण का फिल्मों तक पहुंचने का सफर बेहद दिलचस्प रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने पिता के व्यवसाय से जुड़े थे। इसी दौरान लाहौर में उनकी मुलाकात पटकथा लेखक वली मोहम्मद से हुई, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर फिल्मों में आने का सुझाव दिया। शुरुआत में उन्होंने इस प्रस्ताव को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन बाद में अभिनय की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया।
खलनायकी से मिली सबसे बड़ी पहचान
प्राण ने वर्ष 1940 में पंजाबी फिल्म ‘यमला जट’ से अभिनय करियर की शुरुआत की। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद वह मुंबई पहुंचे और शुरुआती दौर में कुछ फिल्मों में नायक की भूमिका निभाई। हालांकि वर्ष 1948 में फिल्म ‘जिद्दी’ में खलनायक बनने के बाद उनका करियर नई दिशा में आगे बढ़ा। इसके बाद उन्होंने ऐसे प्रभावशाली नकारात्मक किरदार निभाए कि दर्शक उन्हें पर्दे पर देखकर ही रोमांचित हो उठते थे। ‘अदालत’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय खलनायकों की श्रेणी में स्थापित कर दिया।
चरित्र भूमिकाओं में भी छोड़ी अमिट छाप
साठ के दशक के अंत में प्राण ने चरित्र अभिनय की ओर रुख किया और अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। फिल्म ‘उपकार’ में निभाया गया ‘मलंग चाचा’ का किरदार उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ। इसके बाद ‘जंजीर’ में ‘शेर खान’ सहित कई यादगार भूमिकाओं से उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ खलनायक ही नहीं, बल्कि हर तरह के किरदार को जीवंत बनाने वाले अभिनेता थे। सत्तर से नब्बे के दशक तक उन्होंने लगातार दर्शकों का मनोरंजन किया।
सम्मान, लोकप्रियता और अमर विरासत
पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर में प्राण ने लगभग 350 फिल्मों में अभिनय किया। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई फिल्मों में उन्हें मुख्य अभिनेता से भी अधिक पारिश्रमिक मिलने की चर्चा रही। उन्हें तीन बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार मिला। वर्ष 2001 में पद्म भूषण और 2013 में भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 12 जुलाई 2013 को उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी अदाकारी आज भी भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे प्रेरणादायक विरासतों में गिनी जाती है।




