Iran-US Conflict: ईरान के पलटवार के बाद टूटी शांति, ट्रंप ने खत्म की डील; दुनिया पर मंडराया गैस-तेल संकट
ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ गया है। ट्रंप ने शांति समझौता खत्म कर दिया, जबकि होर्मुज संकट के चलते पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका तेज हो गई है।
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कारोबारी जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज हो गया है। अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुआ शांति समझौता खत्म होने की घोषणा कर दी है। बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर संकट गहराने तथा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल की आशंका बढ़ गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शुरू हुआ नया विवाद
ताजा तनाव की शुरुआत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन कॉमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों से हुई। इनमें कतर का एक एलएनजी (LNG) टैंकर और सऊदी अरब का एक तेल टैंकर भी शामिल बताया गया है। अमेरिका ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की।
अमेरिका का बड़ा हवाई हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों, रडार साइटों, एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों और ड्रोन लॉन्च साइटों पर व्यापक हवाई हमले किए। रिपोर्टों के अनुसार, बुशहर, बंदर अब्बास, सिरीक और केशम द्वीप समेत कई इलाकों में विस्फोट हुए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई और इसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था।
ईरान का पलटवार, बहरीन और कुवैत में अलर्ट
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के अनुसार, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने बुशहर प्रांत के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया है। वहीं कुवैत की सेना ने कई मिसाइलों और ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम से नष्ट करने की पुष्टि की है। बढ़ते खतरे के बीच बहरीन और कुवैत में कई बार हवाई हमले के सायरन भी बजाए गए।
ट्रंप ने खत्म किया ईरान के साथ समझौता
बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि ईरान के साथ युद्ध रोकने के लिए हुआ समझौता अब समाप्त हो चुका है। ट्रंप ने कहा कि वह अब तेहरान के साथ किसी नई बातचीत के इच्छुक नहीं हैं और ईरान की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था पर भी तीखी टिप्पणी की। साथ ही अमेरिका ने वह विशेष लाइसेंस भी रद्द कर दिया, जिसके तहत ईरान को सीमित मात्रा में तेल निर्यात की अनुमति दी गई थी।
नाटो सहयोगियों पर भी बरसे ट्रंप
तुर्की में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने सहयोगी देशों के रवैये पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कई सहयोगी देशों ने अमेरिका का अपेक्षित समर्थन नहीं किया। हालांकि नाटो प्रमुख और कुछ सदस्य देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई को सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक बताया।
क्यों बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें?
इस पूरे विवाद का सबसे अहम केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल और एलएनजी व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी जलमार्ग से गुजरता है। यदि यहां सैन्य गतिविधियां और बढ़ती हैं या जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसके कई बड़े असर हो सकते हैं—
- वैश्विक तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
- जहाजों का बीमा और परिवहन लागत बढ़ सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी आ सकती है।
- पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस महंगी हो सकती है।
- भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर महंगाई का अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक तनाव बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू ईंधन कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि यह संकट कितना लंबा चलता है और वैश्विक आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है।




