बिहार में रिशुश्री महाघोटाले पर सियासत तेज! तेजस्वी यादव का बड़ा हमला- छोटे अफसरों पर गाज, बड़े चेहरों को क्यों बचा रही सरकार?
Rishushree Scam Bihar: रिशुश्री महाघोटाले पर तेजस्वी यादव ने उठाए 20 सवाल। आईएएस अधिकारियों के निलंबन, गुजरात कनेक्शन, कमीशन खोरी और 99 संपत्तियों को लेकर एनडीए सरकार को घेरा।
पटना: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कथित रिशुश्री महाघोटाले को लेकर एक बार फिर सूबे की एनडीए सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक विस्तृत और बेहद आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में हजारों करोड़ रुपये का महाघोटाला हुआ है। तेजस्वी ने कहा कि पिछले 21 वर्षों से अधिकांश समय सत्ता में रही एनडीए सरकार को अब जनता के सामने पाई-पाई का हिसाब देना होगा। सरकार को घेरते हुए उन्होंने 20 गंभीर सवाल दागे हैं और आरोप लगाया है कि केवल छोटे अधिकारियों को मोहरा बनाकर किंगपिन और बड़े रसूखदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
टेंडर प्रक्रिया और वरिष्ठ IAS अफसरों से सांठगांठ का आरोप
तेजस्वी यादव ने सरकार के निगरानी तंत्र को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि आखिर एक सामान्य ठेकेदार रिशुश्री के पास इतनी ताकत कहाँ से आई कि वह कई सरकारी विभागों के टेंडर अपनी मर्जी से मैनेज कर रहा था? उन्होंने ईडी (ED) की जांच का हवाला देते हुए कहा कि सामने आए चैट्स से साफ है कि रिशुश्री का प्रभाव कई वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों तक था। नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि रिशुश्री को किसका राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था और वह किसके इशारे पर अधिकारियों को निर्देश दे रहा था?
चार्जशीट में बड़े नामों की ‘नो एंट्री’ और कमीशन राज
विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी ने पूछा कि जिन दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया गया, उनके नाम चार्जशीट में क्यों गायब हैं? उनकी गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “क्या सरकार को डर है कि इन अफसरों पर कड़ा शिकंजा कसा गया, तो वे पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर देंगे?”
जांच के हवाले से उन्होंने दावा किया कि विभागों में बिल पास कराने और टेंडर दिलाने के एवज में 2% से 3.5% तक का तय कमीशन लिया जाता था, जो नीतीश सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की हवा निकालता है।
भ्रष्टाचार का बड़ा नेटवर्क: “छापेमारी में 99 संपत्तियों के दस्तावेज, करोड़ों की नकदी और आभूषण मिले हैं। आखिर एक ठेकेदार के पास इतनी दौलत कैसे आई? गृह विभाग, आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और खुफिया एजेंसियां इस भारी वित्तीय लेन-देन से अनजान कैसे रहीं?” — तेजस्वी यादव
न्यायिक जांच, गुजरात कनेक्शन और मंत्रियों के इस्तीफे की मांग
तेजस्वी ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने एक नया मोर्चा खोलते हुए सवाल उठाया कि क्या रिशुश्री से जुड़ी लाभान्वित कंपनियों का ‘गुजरात’ से होना उन्हें मिल रहे सरकारी संरक्षण की मुख्य वजह है? उन्होंने डिजिटल सुरक्षा पर भी सवाल उठाए कि जब सूबे में ई-टेंडरिंग लागू है, तो यह सिंडिकेट पूरी प्रणाली को कैसे हैक कर रहा था। तेजस्वी ने मांग की कि वित्त, जल संसाधन और भवन निर्माण जैसे दागी विभागों के मंत्रियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
कार्रवाई के नाम पर भेदभाव का आरोप
अपने 20वें और अंतिम सवाल में तेजस्वी यादव ने एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक कार्ड खेलते हुए आरोप लगाया कि जब भी किसी बड़े घोटाले में सरकार पर दबाव बनता है, तो कार्रवाई का ठीकरा अक्सर दलित, पिछड़े और मुस्लिम समुदाय के छोटे अधिकारियों पर फोड़ दिया जाता है, जबकि शीर्ष पदों पर बैठे ‘रसूखदार’ सुरक्षित निकल जाते हैं। उन्होंने साफ किया कि बिहार की जनता इस महाघोटाले की निष्पक्ष जांच और सभी दोषियों पर एक समान कार्रवाई चाहती है।




