मध्य प्रदेश

MP में अदालतों की डिजिटल क्रांति: अब फोटो-वीडियो सीधे बनेंगे कानूनी सबूत, ‘ई-साक्ष्य नियम-2026’ लागू

मध्य प्रदेश में 'मप्र इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग नियम-2026' लागू। अब अदालतों में बिना 65B सर्टिफिकेट के फोटो, वीडियो और ऑडियो सीधे सबूत माने जाएंगे। जानिए कैसे काम करेगा NIC का ई-साक्ष्य ऐप।

भोपाल: मध्य प्रदेश की न्यायिक और कानून व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है। प्रदेश सरकार ने अदालतों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (Electronic Evidence) के इस्तेमाल को बेहद आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ‘मप्र इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग नियम-2026’ का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब फोटो, ऑडियो और वीडियो जैसे डिजिटल साक्ष्यों को अदालत में सीधे सबूत के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। इसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

NIC का विशेष ‘ई-साक्ष्य ऐप’ करेगा कमाल, हैश वैल्यू से पकड़ी जाएगी एडिटिंग

गृह विभाग द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, यह पूरा सिस्टम इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के जरिए ऑपरेट होगा। इस नियम को हाई कोर्ट की सलाह के बाद अंतिम रूप दिया गया है।

नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा तैयार खास ई-साक्ष्य ऐप की मदद से पुलिस अब घटनास्थल पर ही रियल-टाइम वीडियो, फोटो और गवाहों के बयान रिकॉर्ड करेगी।

कैसे सुरक्षित रहेंगे सबूत? ऐप पर रिकॉर्डिंग होते ही डेटा सीधे सुरक्षित सर्वर पर अपलोड हो जाएगा। हर एक डिजिटल रिकॉर्ड का एक डिजिटल फिंगरप्रिंट यानी ‘हैश वैल्यू’ तैयार होगा। अगर भविष्य में वीडियो या फोटो के साथ कोई छेड़छाड़ या एडिटिंग की जाती है, तो सिस्टम तुरंत उसे रिजेक्ट कर देगा।

क्या बदल जाएगा आम जनता और पुलिस के लिए?

  • 65B सर्टिफिकेट का झंझट खत्म: पहले कोर्ट में डिजिटल साक्ष्य पेश करने के लिए लंबी-चौड़ी कागजी प्रक्रिया और सर्टिफिकेट की जरूरत होती थी, जो अब नहीं होगी।
  • मोबाइल-लैपटॉप नहीं होंगे जब्त: जांच के दौरान अब पीड़ित या गवाहों के कीमती गैजेट्स (जैसे मूल मोबाइल या लैपटॉप) को पुलिस महीनों तक जब्त नहीं रखेगी। प्रमाणित डिजिटल कॉपी ही कोर्ट में मान्य होगी।
  • फास्ट ट्रैक होगी जांच: पुलिस, फॉरेंसिक लैब (FSL) और अदालतों के बीच जो डिजिटल रिकॉर्ड महीनों में ट्रांसफर होते थे, वे अब चंद घंटों में पहुंच जाएंगे। इससे मुकदमों का फैसला जल्दी होगा।

सुरक्षा और गोपनीयता पर कड़ा पहरा

इस डिजिटल सिस्टम में डेटा लीक को रोकने के लिए प्राइवेसी का विशेष ध्यान रखा गया है। केवल अधिकृत (Authorized) अधिकारी और मामले से जुड़े पक्ष ही इन रिकॉर्ड्स को देख सकेंगे। डेटा के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या फर्जीवाड़ा करने पर सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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