इंदौर-मुंबई का सफर होगा आसान: 309 KM की नई रेल लाइन से 4 घंटे की होगी बचत!
इंदौर मनमाड़ रेल लाइन परियोजना से इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी लगभग 200 किलोमीटर कम हो जाएगी। 18,036 करोड़ रुपये की लागत वाला यह 309 किमी लंबा रेल रूट मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई प्रमुख शहरों को जोड़ेगा। इसके शुरू होने से यात्रा के समय में करीब 4 से 4.5 घंटे की बचत होगी और पीथमपुर इंडस्ट्रियल हब सीधे मुंबई पोर्ट से जुड़ जाएगा।

इंदौर. इंदौर मनमाड़ रेल लाइन प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। 309 किमी लंबी यह परियोजना इंदौर और मुंबई के बीच दूरी कम करेगी। पीएम गति शक्ति योजना के तहत बनने वाले इस रूट से औद्योगिक विकास, धार्मिक पर्यटन और व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी। परियोजना के पूरा होने से दोनों राज्यों के 8 जिलों को सीधा रेल नेटवर्क मिलेगा।
इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना में आई तेजी
मध्य भारत और पश्चिमी भारत के बीच रेल नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश के जिन इलाकों से यह नई पटरी गुजरनी है, वहां जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति दे दी गई है। केंद्र सरकार की पीएम गति शक्ति योजना के तहत मंजूर यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच व्यापार, उद्योग और पर्यटन को एक नया आयाम देगा। दोनों राज्यों के बीच दूरियों को कम करने वाला यह प्रोजेक्ट आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
वन भूमि हस्तांतरण और प्रभावित जिले
इस 309 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में कुल 349.789 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेलवे और वन विभाग के बीच बनी सहमति के आधार पर मध्य प्रदेश में 207.3023 हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 142.4867 हेक्टेयर वन भूमि ली जाएगी। इस नए रेल मार्ग के बनने से मध्य प्रदेश के इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी तथा महाराष्ट्र के धुले, नासिक और मनमाड़ जिले आपस में सीधे रेल कनेक्टिविटी से जुड़ जाएंगे।
इंदौर और मुंबई के बीच घटेगी दूरी
इंदौर से मुंबई के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को इस नई रेल लाइन के शुरू होने से काफी राहत मिलेगी। नया रूट चालू होने पर दोनों शहरों के बीच की रेल दूरी लगभग 200 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। आधुनिक पटरियों और छोटे रास्ते की वजह से ट्रेन के सफर में लगभग 4 से 4.5 घंटे की बचत होगी। यह नया विकल्प उत्तर भारत को दक्षिण और पश्चिमी भारत से बेहतर तरीके से जोड़ेगा, जिससे यात्रियों का समय और संसाधन दोनों बचेंगे।
बजट और परियोजना की समयावधि
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के रेल नेटवर्क के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस परियोजना की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये स्वीकृत की गई है। इस 309 किलोमीटर लंबे मार्ग में से लगभग 170 किलोमीटर हिस्सा मध्य प्रदेश और करीब 139 किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र के अंतर्गत आता है। मध्य प्रदेश सरकार भी इस मेगा प्रोजेक्ट में अपना योगदान दे रही है। रेलवे ने इस रेल लाइन परियोजना को वर्ष 2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
औद्योगिक विकास और कनेक्टिविटी के लाभ
वर्तमान में इंदौर से मुंबई जाने वाली ट्रेनें रतलाम और वडोदरा होकर गुजरती हैं, लेकिन इस रूट के बनने के बाद ट्रेनें सीधे मनमाड़ के रास्ते मुंबई जा सकेंगी। इससे यात्रा का समय घटकर काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा, मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र ‘पीथमपुर’ सीधे मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से कनेक्ट हो जाएगा। इस कनेक्टिविटी से माल ढुलाई आसान होगी और दक्षिण भारत से मध्य भारत का व्यापारिक संपर्क और बेहतर होगा।
34 रेलवे स्टेशनों से लाखों को फायदा
इस पूरे रेल मार्ग पर कुल 34 रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें 30 नए स्टेशन शामिल हैं और कुछ पुराने स्टेशनों को आधुनिक रूप दिया जाएगा। मध्य प्रदेश के इंदौर, पीथमपुर, धर्मपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, जुलवानिया और डॉ. अंबेडकर नगर जैसे क्षेत्र इसमें शामिल हैं। वहीं महाराष्ट्र के नरडाना, धुले और मालेगांव जैसे शहरों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। इन स्टेशनों के बनने से लगभग 1,000 गांवों और 30 लाख से अधिक की आबादी को सीधी ट्रेन सुविधा मिलेगी।




