यूपी में मिला फॉस्फोराइट भंडार: घट जाएगी खेती की लागत, राजस्व में भारी उछाल
उत्तर प्रदेश के ललितपुर और विंध्य पर्वत श्रृंखला में फॉस्फोराइट का विशाल भंडार मिला है। इसके खनन से दलहन, बागवानी और फूलों की खेती की लागत में बड़ी कमी आएगी। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने आधुनिक तकनीक और जीरो टॉलरेंस नीति के बल पर राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हासिल की है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।

लखनऊ. ओवरलोडिंग, अवैध गतिविधियों और विभिन्न जांचों के दौर से निकलकर भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग अब उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में अहम योगदान दे रहा है। राज्य के ललितपुर और विंध्य पर्वत श्रृंखला में फॉस्फोराइट का समृद्ध भंडार चिन्हित किया गया है। इसके उत्खनन के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक अनुमति मांगी गई है। अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलते ही खनन का काम शुरू हो जाएगा। इस खनिज की स्थानीय उपलब्धता से राज्य में दलहनी फसलों, फूलों और बागवानी की खेती में आने वाली लागत में उल्लेखनीय कमी देखने को मिलेगी।
राजस्व संग्रह में ऐतिहासिक वृद्धि
खनन विभाग की प्रशासनिक प्रमुख माला श्रीवास्तव के अनुसार, बालू, मौरंग और पत्थर खनन के पारदर्शी प्रबंधन से बीते नौ वर्षों में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा वर्ष 2017 से पहले के 4,700 करोड़ रुपये के राजस्व से कई गुना अधिक है। कड़े नियमों और सतत निगरानी के चलते अब तक 66 अवैध खनन क्षेत्रों को चिन्हित कर पूरी तरह बंद कराया जा चुका है, जिससे अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा है।
नये खनिजों की खोज और अनापत्ति प्रक्रिया
प्रदेश में नए खनिजों और लौह अयस्क की मौजूदगी को लेकर लगातार वैज्ञानिक शोध जारी हैं। विंध्य पर्वत श्रृंखला और ललितपुर में मिले फॉस्फोराइट के चार ब्लॉकों में खनन के लिए तीन प्रमुख कंपनियों ने अपनी रुचि व्यक्त की है। खनन प्रक्रिया शुरू करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी अनिवार्य है, जिसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त, राज्य के पर्वतीय हिस्सों में अभ्रक, संगमरमर, चूना पत्थर और सिलिका सैंड की मौजूदगी के वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।
आधुनिक तकनीक और नई नीतियों का समावेश
निदेशालय परिसर में आधुनिक तकनीक से लैस पीजीआरएस प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इसके माध्यम से इंटीग्रेटेड माइनिंग सर्विलांस सिस्टम, जियो-फेंसिंग, आरएफआईडी टैग, एआई और आईओटी आधारित चेकगेट्स से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। एम-सैंड नीति-2024 के सफल क्रियान्वयन से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ वैकल्पिक निर्माण सामग्री के उपयोग को बढ़ावा मिला है।
जीरो टॉलरेंस नीति से आत्मनिर्भरता की ओर
खनन विभाग पूरी तरह से जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहा है, जिससे सरकारी राजस्व में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश को कृषि और बागवानी में इस्तेमाल होने वाले फास्फोरस के लिए राजस्थान पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर खनन शुरू होने से यह निर्भरता समाप्त होगी और राज्य कृषि उत्पादन के मामले में और अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।




