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Sahara-SEBI Case: सुप्रीम कोर्ट में बड़ा मोड़, अधिकारियों को मिली राहत पर सेबी की चुनौती

सहारा-सेबी मामले में 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट अहम सुनवाई करेगा। अधिकारियों को मिली राहत पर सेबी ने चुनौती दी है। निवेशकों के रिफंड और ओएफसीडी विवाद से जुड़े लंबित मामलों पर भी सुनवाई होगी।

Sahara-SEBI Case: नई दिल्ली. सहारा-सेबी विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में अहम मोड़ पर पहुंच गया है। 13 जुलाई को शीर्ष अदालत भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की उस याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) द्वारा सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) के कुछ अधिकारियों को दी गई राहत को चुनौती दी गई है। इसी दिन सहारा समूह से जुड़े अन्य लंबित मामलों, जिनमें निवेशकों के धनवापसी का मुद्दा भी शामिल है, पर भी सुनवाई प्रस्तावित है।

अधिकारियों को मिली राहत पर सेबी की आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले मामले की सुनवाई स्वीकार करते हुए सहारा समूह के चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया था और उन्हें निर्धारित समय तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अब अदालत के समक्ष यह भी तय होगा कि जिन प्रबंधकों और कंपनी सचिव को SAT ने राहत दी थी, वह कानूनी रूप से उचित थी या नहीं। सेबी का कहना है कि इस हिस्से की दोबारा न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।

ओएफसीडी के जरिए जुटाई गई बड़ी रकम बना विवाद का आधार

पूरा विवाद वर्ष 1998 से 2008 के बीच वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (OFCD) जारी करने से जुड़ा है। न्यायाधिकरण ने माना था कि इतने बड़े स्तर पर निवेशकों से धन जुटाना निजी निवेश नहीं बल्कि सार्वजनिक निर्गम की श्रेणी में आता है, इसलिए यह सेबी के नियामकीय अधिकार क्षेत्र में शामिल है। रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी ने करीब 1.98 करोड़ निवेशकों से लगभग 14,106 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिसे लेकर नियामकीय कार्रवाई की गई।

निदेशकों की अपील खारिज, कर्मचारियों को मिली थी राहत

SAT ने कंपनी और उसके निदेशकों की अपील को खारिज करते हुए सेबी की कार्रवाई को सही ठहराया था। हालांकि, चार प्रबंधकों और कंपनी सचिव की अलग अपील स्वीकार करते हुए कहा गया कि केवल कर्मचारी होने के कारण उन्हें कंपनी के निर्णयों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। न्यायाधिकरण ने यह भी माना कि कंपनी सचिव ने निदेशकों की ओर से अधिकृत दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, इसलिए अंतिम जवाबदेही निदेशकों की बनती है।

निवेशकों के रिफंड पर भी बनी रहेगी नजर

सेबी ने अब इसी राहत वाले हिस्से को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामला वर्ष 2018 के उस आदेश से भी जुड़ा है, जिसमें सेबी ने कंपनी को ओएफसीडी के माध्यम से जुटाई गई राशि निवेशकों को लौटाने, अपनी परिसंपत्तियों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने और संबंधित अधिकारियों पर प्रतिभूति बाजार में प्रतिबंध लगाने जैसे निर्देश दिए थे। 13 जुलाई की सुनवाई में न केवल अधिकारियों की जिम्मेदारी बल्कि निवेशकों के रिफंड से जुड़े लंबित मुद्दों पर भी सभी की नजरें बनी रहेंगी।

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