रामसर वेटलैंड पर मंडराया संकट: 5 किमी दायरे में कोयला डिपो और वाशरी का खुलासा
छत्तीसगढ़ के इकलौते कोपरा रामसर स्थल पर औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। वन विभाग के प्राथमिक सर्वे में जलाशय के 5 किलोमीटर के दायरे में 2 कोल वाशरी और 9 कोल डिपो की मौजूदगी सामने आई है। जिला वेटलैंड समिति ने रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। अब दिल्ली और राज्य की संयुक्त टीम मास्टर प्लान तैयार कर संरक्षण के उपाय तय करेगी।
रायपुर. छत्तीसगढ़ के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय महत्व के कोपरा रामसर स्थल के आसपास चल रही औद्योगिक गतिविधियों पर पहली आधिकारिक रिपोर्ट उजागर हुई है। वन विभाग द्वारा तैयार किए गए प्राथमिक सर्वे के अनुसार, इस संवेदनशील रामसर क्षेत्र के मात्र 5 किलोमीटर के दायरे में 2 बड़े कोल वाशरी और 9 कोल डिपो संचालित हो रहे हैं। इन गतिविधियों से जलाशय के प्राकृतिक पर्यावरण और जलीय जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
राज्य सरकार को भेजी गई रिपोर्ट और आगामी मास्टर प्लान
प्रारंभिक सर्वे की यह विस्तृत रिपोर्ट जिला वेटलैंड समिति के जरिए राज्य सरकार को सौंप दी गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब दिल्ली और राज्य स्तर की एक संयुक्त विशेषज्ञ टीम पूरे क्षेत्र का गहन अध्ययन करेगी और एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करेगी। इस आगामी रिपोर्ट के सुझावों के आधार पर ही जलाशय के स्थायी संरक्षण और सुरक्षात्मक कदमों से संबंधित अंतिम फैसले लिए जाएंगे। लगभग 210 हेक्टेयर यानी 2.10 वर्ग किलोमीटर में फैले इस विशाल कोपरा जलाशय को करीब 7 महीने पहले ही रामसर स्थल की मान्यता मिली थी, जिसके बाद वन विभाग ने इसके जलग्रहण क्षेत्र का सर्वेक्षण शुरू किया था।
कैचमेंट क्षेत्र से प्रदूषण फैलने की बढ़ी आशंका
सर्वे रिपोर्ट में मुख्य रूप से कोपरा, बेलमंडी, सैदा और संबलपुरी-बहतराई क्षेत्रों में चल रहे कोल डिपो, वाशरी और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का पूरा ब्योरा शामिल किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ये सभी औद्योगिक क्षेत्र भौगोलिक रूप से ऊंचाई पर स्थित हैं। मानसून के दौरान जब भारी बारिश होती है, तो इन कोल परिसरों का बहता हुआ पानी और अवसाद सीधे ढलान के साथ जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में पहुंचता है, जिससे पानी के दूषित होने का जोखिम लगातार बढ़ रहा है।




