ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल: नीरज चोपड़ा बोले- भारतीय एथलीटों का मनोबल और आत्मविश्वास अब चरम पर
ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने पहुंचे एथलीट नीरज चोपड़ा का वक्तव्य। भारतीय खिलाड़ियों के बढ़ते आत्मविश्वास, रणनीतियों और आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारियों पर विवरण।
टोक्यो में भारत का नाम रोशन करने वाले प्रमुख भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भाग लेने हेतु ग्लासगो पहुंच गए हैं। ऑस्ट्रेलिया में पूर्व में हासिल की गई सफलता को पुनः दोहराने के संकल्प के साथ वे मैदान में उतर रहे हैं। उनका मानना है कि वर्तमान समय में देश के खिलाड़ी अधिक साहसी हो चुके हैं तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्वयं को विदेशी प्रतियोगियों की तुलना में किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं समझते।
एथलीटों के बढ़ते आत्मविश्वास पर राय
संवाददाताओं से वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों के दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव आया है। पूर्व में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करते समय जो झिझक या घबराहट दिखाई देती थी, वह अब समाप्त हो चुकी है। निरंतर कठोर अभ्यास और बेहतर सुविधाओं के बल पर खिलाड़ियों का आत्मबल सुदृढ़ हुआ है, जिससे वे बिना किसी भय के अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रतिकूल मौसम और मानसिक मजबूती
ग्लासगो की ठंडी जलवायु और तेज हवाओं से संबंधित प्रश्न पर उन्होंने स्पष्ट किया कि परिस्थितियां भले ही कठिन हों, परंतु वे सभी प्रतिभागियों के लिए एक समान हैं। ऐसे वातावरण में विचलित होने के स्थान पर मानसिक रूप से सुदृढ़ रहना आवश्यक है। विपरीत परिस्थितियों के बीच भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे निकाला जाए, इस सोच के साथ आगे बढ़ना उनकी प्राथमिकता रहती है।
रणनीति और पूर्ण समर्पण पर ध्यान
प्रतियोगिता के दौरान किसी विशिष्ट अंक या आंकड़े को लक्ष्य बनाने के स्थान पर उनका ध्यान अपनी कार्ययोजना और तकनीक के सही क्रियान्वयन पर केंद्रित रहता है। उनका ध्येय मैदान पर अपना शत-प्रतिशत योगदान देना है, ताकि आयोजन के पश्चात किसी प्रकार का मलाल न रहे। वे मौसम और परिस्थितियों के अनुसार अपना सर्वोत्तम खेल दिखाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
देश का प्रतिनिधित्व और साथियों का उत्साह
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगे का प्रतिनिधित्व करने को वे अत्यंत गौरवपूर्ण मानते हैं। उन्होंने अन्य भारतीय एथलीटों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि रोहित जैसे साथी खिलाड़ी भी उत्कृष्ट थ्रो कर रहे हैं। सभी खिलाड़ी एकजुट होकर देश के लिए बेहतर परिणाम हासिल करने का प्रयास करेंगे और राष्ट्र का नाम ऊंचा करेंगे।
शारीरिक फिटनेस और कमियों पर काम
अपनी शारीरिक स्थिति के संदर्भ में उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के बाद मिली समयावधि का उपयोग उन्होंने अपनी फिटनेस सुधारने और पुरानी कमियों को दूर करने में किया है। वर्तमान में वे स्वयं को पहले से कहीं अधिक चुस्त और प्रतिस्पर्धी मुकाबले के लिए पूर्णतः तैयार महसूस कर रहे हैं।
निरंतर प्रतियोगिताओं की तैयारी
राष्ट्रमंडल खेलों के तुरंत बाद आयोजित होने वाली अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि शेड्यूल काफी व्यस्त है। उनका प्राथमिक उद्देश्य स्वयं को पूरी तरह से फिट रखते हुए आगामी एशियाई स्पर्धाओं और अन्य बड़े आयोजनों में निरंतरता बनाए रखना है।
दूरी के दबाव से परे अपने रिकॉर्ड में सुधार
लंबी दूरी के थ्रो से जुड़े दबाव के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि आंकड़ों का कोई बोझ वे अपने मस्तिष्क पर नहीं लेते। एक पेशेवर एथलीट के रूप में उनकी प्राथमिकता सदैव अपने ही व्यक्तिगत रिकॉर्ड में सुधार करना और विश्व के सर्वश्रेष्ठ भाला फेंक खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह मजबूत बनाए रखना होता है।
अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीख
पूर्व प्रतियोगिताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती थ्रो के माध्यम से उन्हें अपनी तकनीकी सीमाओं का अहसास हुआ था। वैश्विक स्तर पर मिली उन सीखों का लाभ उठाकर वे इस बार ग्लासगो के मैदान पर और अधिक निखार के साथ अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
कड़ा मुकाबला और वैश्विक चुनौतियां
स्पर्धा के स्तर को लेकर उन्होंने स्वीकार किया कि इस बार का मैदान काफी चुनौतीपूर्ण है। इसमें ओलंपिक, राष्ट्रमंडल और डायमंड लीग के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी शामिल हो रहे हैं, जिसके कारण मुकाबला अत्यधिक कड़ा और रोमांचक होने की पूरी संभावना है।
शासकीय सहयोग की सराहना
उत्कृष्ट प्रशिक्षण सुविधाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने शासन द्वारा मिल रहे निरंतर समर्थन की प्रशंसा की। विदेशों में जाकर अभ्यास करने के अवसरों से भारतीय दल को अपनी प्रतिभा चमकाने का पूरा मौका मिला है, जिससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल रहा है।




