तमिलनाडु में हिरासत में मौत पर सियासी भूचाल, विजय सरकार पर विपक्ष का तीखा हमला
तमिलनाडु के नागरकोइल कस्टडी डेथ केस ने सियासत गरमा दी है। दिव्यांग कैदी की मौत के बाद विजय सरकार विपक्ष के निशाने पर है। गिरफ्तारी, निलंबन और CBI जांच की मांग से मामला और गंभीर हो गया।
Nagercoil Custodial Death Caseनागरकोइल. तमिलनाडु में हाल ही में सत्ता में आई टीवीके सरकार एक गंभीर विवाद के कारण विपक्ष के निशाने पर आ गई है। सरकार बनने के करीब दो महीने के भीतर नागरकोइल में न्यायिक हिरासत के दौरान एक दिव्यांग कैदी की मौत ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। घटना के बाद विपक्षी दल लगातार सरकार की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई गंभीरता
नागरकोइल के एथनकाडु निवासी 35 वर्षीय दिव्यांग एस. सबरी वर्मन को प्रतिबंधित गुटखा बेचने के आरोप में 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार उनकी दुकान से प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद बरामद हुए थे। शुरुआती स्तर पर मौत को सामान्य घटना बताने की कोशिश हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दे दिया। रिपोर्ट में शरीर के विभिन्न हिस्सों पर 19 चोटों के निशान मिलने से हिरासत के दौरान हिंसा की आशंका गहरा गई।
जेल स्टाफ और कैदियों पर कार्रवाई
प्राथमिक जांच में सामने आया कि 13 जुलाई की रात बैरक के भीतर सबरी वर्मन और अन्य कैदियों के बीच विवाद हुआ था। आरोप है कि विवाद के दौरान हस्तक्षेप करने पहुंचे जेल कर्मचारियों ने भी उनके साथ मारपीट की। घटना के बाद जांच एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर एक चीफ वार्डन समेत तीन जेल कर्मचारियों को निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा आठ अन्य कैदियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि घटना के कई दिन बाद तक सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई और पीड़ित परिवार को तत्काल राहत भी नहीं मिली। इसी मुद्दे को लेकर सरकार की जवाबदेही पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।
CBI जांच की मांग हुई तेज
मामले ने राजनीतिक रूप से और तूल तब पकड़ लिया जब विभिन्न दलों के नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। वहीं पीएमके ने पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच से ही हिरासत में हुई मौत की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकेंगी। अब इस मामले की जांच और सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।




