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महाराष्ट्र में फिर बड़ा सियासी भूचाल: ‘ऑपरेशन टाइगर’ से संकट में उद्धव ठाकरे, शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं बागी सांसद!

महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर सियासत गरमा गई है। उद्धव ठाकरे गुट के बागी सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों और आदित्य ठाकरे के तीखे हमले पर पूरी रिपोर्ट।

मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। सोमवार, 22 जून 2026 से शुरू होने जा रहे राज्य विधानसभा के तीन सप्ताह के मानसून सत्र से ठीक पहले ‘ऑपरेशन टाइगर’ ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) की धड़कनें बढ़ा दी हैं। विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन उद्धव गुट के कुछ लोकसभा सांसदों को अपने पाले में लाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसद आज शाम 4 बजे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का हाथ थाम सकते हैं। इस संभावित घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

‘बेशर्मी से बिक गई तुम्हारी वफादारी’: बागियों पर भड़के आदित्य ठाकरे

सांसदों के पाला बदलने की खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला:

  • जनादेश से विश्वासघात: आदित्य ठाकरे ने कहा कि दल बदलने वाले सांसदों ने साबित कर दिया है कि उनकी वफादारी और साख बेशर्मी से बिकाऊ है।
  • NDA के खिलाफ मिला था वोट: उन्होंने याद दिलाया कि जो सांसद अब पाला बदल रहे हैं, वे महाविकास अघाड़ी (MVA) और INDIA गठबंधन के मंच पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। उनके लिए शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने पसीना बहाया था और मतदाताओं ने उन्हें एनडीए के खिलाफ वोट दिया था।
  • लालच की राजनीति: आदित्य ने आरोप लगाया कि विचारधारा बदलने की दलीलें अब बेकार हैं, सच्चाई यही है कि सिर्फ लालच के कारण रातों-रात जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात किया गया है।

यह उद्धव के साथ नहीं, लोकतंत्र के साथ धोखा है: मनोज झा

शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों में मची इस भगदड़ पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सत्ता पक्ष की इस सियासी इंजीनियरिंग पर सवाल उठाते हुए कहा: “उन्हें बागी कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने शिवसेना (UBT) के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा था। जब शिवसेना (UBT) या किसी भी विपक्षी पार्टी में इस तरह की इंजीनियरिंग की जाती है, तो यह उस पार्टी का संकट नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हमारे लोकतंत्र का संकट है। यह सिर्फ उद्धव ठाकरे के साथ धोखा नहीं है, बल्कि उन मतदाताओं के साथ भद्दा मजाक है जिन्होंने एक विकल्प देखकर उन्हें अपना कीमती वोट दिया था।”

‘ऑपरेशन टाइगर’ के जवाब में ‘ऑपरेशन वुल्फ’ की चेतावनी

इस सियासी घमासान के बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भी साफ कर दिया है कि विपक्ष शांत नहीं बैठेगा। उन्होंने ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जवाब में ‘ऑपरेशन वुल्फ’ शुरू करने की चेतावनी दी है, जिससे साफ है कि 10 जुलाई तक चलने वाले इस मानसून सत्र में सदन के भीतर भारी हंगामा और तीखा टकराव देखने को मिलेगा।

राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच बनेगा मानसून सत्र

इस बार विधानसभा और विधानपरिषद दोनों सदनों में आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की संभावना है, जिसका फायदा उठाकर सत्ता पक्ष अपने विधायी एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाना चाहेगा। पहले सप्ताह में ही विधानपरिषद के उपसभापति पद के लिए चुनाव कराने की तैयारी है, जिसमें शिवसेना नेता नीलम गोरहे को दोबारा इस पद पर बैठाया जा सकता है। सदन में पूरक बजट मांगों पर बहस और नारेबाजी के साथ-साथ राज्य में अनियमित मानसून और किसानों की समस्याओं को लेकर भी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी है।

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