छत्तीसगढ़

130 एकड़ में शुरू हुआ विशेष प्रदर्शन, सीड-कम-फर्टी ड्रिल से दलहन खेती को नई रफ्तार

छत्तीसगढ़ में सीड-कम-फर्टी ड्रिल तकनीक से दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू हुई है। 130 एकड़ क्षेत्र में अरहर की वैज्ञानिक खेती का प्रदर्शन किया जा रहा है, जिससे उत्पादन बढ़ाने और किसानों की लागत घटाने का लक्ष्य है।

रायपुर. छत्तीसगढ़ में खरीफ मौसम के दौरान दलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के खेतों में सीड-कम-फर्टी ड्रिल तकनीक के माध्यम से अरहर की वैज्ञानिक बोवाई करा रहे हैं। इस पहल का लक्ष्य दलहन फसलों का रकबा और उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत कम करना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।

130 एकड़ में अरहर की वैज्ञानिक खेती का प्रदर्शन

सरगुजा जिले के सोहगा, बरकेला, खजूरी, कुबेरपुर और कुमडेवा गांवों में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जबलपुर के सहयोग से लगभग 130 एकड़ क्षेत्र में अरहर की समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन परियोजना शुरू की गई है। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे वैज्ञानिक तरीके से खेती कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।

कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली तकनीक

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जलवायु परिस्थितियों और सीमित सिंचाई संसाधनों के बीच अरहर एक टिकाऊ और लाभकारी फसल के रूप में उभर रही है। वैज्ञानिक पद्धति और कतार प्रणाली से की गई बोवाई के कारण कम पानी में भी अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। इसी उद्देश्य से किसानों के खेतों में सीड-कम-फर्टी ड्रिल के जरिए बीज और उर्वरक का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया गया है।

बीज, उर्वरक और श्रम लागत में होगी बचत

सीड-कम-फर्टी ड्रिल तकनीक की मदद से बीज और उर्वरक एक साथ निर्धारित मात्रा में डाले जाते हैं, जिससे दोनों की बचत होती है। इसके साथ ही श्रम लागत कम होती है और पौधों के बीच समान दूरी बनाए रखने से बेहतर अंकुरण एवं स्वस्थ विकास सुनिश्चित होता है। किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए अनुशंसित शाकनाशी उपलब्ध कराकर शुरुआती चरण में प्रभावी प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगा आर्थिक लाभ

कार्यक्रम के दौरान किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्वों के सही उपयोग तथा कीट एवं रोग नियंत्रण की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी भी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह देते हुए समय पर कृषि कार्य करने पर जोर दिया। बड़ी संख्या में किसानों ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर आधुनिक तकनीकों के प्रति रुचि दिखाई। कृषि विज्ञान केंद्र प्रदर्शन प्लॉटों की नियमित निगरानी और तकनीकी मार्गदर्शन जारी रखेगा, जिससे किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।

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