Satluj OTT Controversy: ZEE5 से हटाई गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’, जानिए बिना CBFC सर्टिफिकेट भी कैसे लागू होते हैं IT Rules
Satluj OTT Controversy: दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' ZEE5 से हटाई गई। जानिए भारत में बिना CBFC सर्टिफिकेट भी OTT कंटेंट पर IT Rules 2021 कैसे लागू होते हैं और सरकार कब कार्रवाई कर सकती है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ को रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटा दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। भारत में OTT पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए CBFC (सेंसर बोर्ड) का प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं होता, लेकिन उन्हें आईटी नियम, 2021 (IT Rules 2021) के तहत निर्धारित कानूनी दिशानिर्देशों का पालन करना पड़ता है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सरकारी निर्देशों के बाद प्लेटफॉर्म ने फिल्म को फिलहाल स्ट्रीमिंग से हटा दिया है।
बिना सेंसर सर्टिफिकेट भी क्यों हटाई जा सकती है OTT फिल्म?
भारत में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड (CBFC) का प्रमाणपत्र आवश्यक होता है, लेकिन OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाले कंटेंट पर अलग कानूनी व्यवस्था लागू होती है।
ऐसे सभी डिजिटल कंटेंट को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का पालन करना होता है। यदि किसी सामग्री को राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या अन्य कानूनी प्रावधानों के विरुद्ध माना जाता है, तो सरकार उसे हटाने का निर्देश दे सकती है।
IT Rules 2021 के तहत OTT प्लेटफॉर्म्स की क्या जिम्मेदारी है?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा लागू नियमों के अनुसार OTT प्लेटफॉर्म्स को—
- कंटेंट को आयु-आधारित श्रेणियों में वर्गीकृत करना होगा।
- अश्लील, अवैध या राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली सामग्री से बचना होगा।
- प्राप्त शिकायतों का तय समयसीमा में निपटारा करना होगा।
- सरकारी निर्देशों और कानूनी आदेशों का पालन करना होगा।
इन नियमों का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार और कानून के अनुरूप कंटेंट सुनिश्चित करना है।
कैसे काम करती है त्रिस्तरीय निगरानी प्रणाली?
आईटी नियम, 2021 के तहत डिजिटल कंटेंट की निगरानी के लिए तीन स्तर की व्यवस्था बनाई गई है—
- प्लेटफॉर्म का स्व-नियमन: OTT प्लेटफॉर्म स्वयं अपने कंटेंट की समीक्षा और शिकायतों का निस्तारण करते हैं।
- स्वतंत्र स्व-विनियमन निकाय: यदि शिकायत का समाधान नहीं होता, तो मामला स्व-विनियमन संस्था के पास जा सकता है।
- केंद्र सरकार की निगरानी: गंभीर मामलों में केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई या कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है।
शिकायत मिलने पर कितने समय में कार्रवाई जरूरी?
आईटी नियमों के अनुसार—
- सामान्य शिकायतों पर 72 घंटे के भीतर कार्रवाई करना आवश्यक है।
- नग्नता, निजी तस्वीरों के दुरुपयोग या गंभीर उल्लंघन से जुड़े मामलों में 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होती है।
‘सतलुज’ मामले में भी सरकारी निर्देशों के बाद प्लेटफॉर्म ने फिल्म को स्ट्रीमिंग से हटा दिया।
क्यों चर्चा में है ‘सतलुज’?
फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित बताई जा रही है। रिलीज के कुछ ही समय बाद इसे ZEE5 से हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया और फिल्म जगत में इस फैसले को लेकर बहस शुरू हो गई है। हालांकि, प्लेटफॉर्म ने इसे हटाने के पीछे तकनीकी कारण बताए हैं, जबकि रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सरकारी निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया




