उत्तर प्रदेश

दान गिनती पर नया खुलासा! ‘SoP पर मेरे साइन नहीं’, चंपत राय के कथित पत्र से बढ़ी हलचल

राम मंदिर दान चोरी मामले में चंपत राय का कथित पत्र वायरल। SoP पर हस्ताक्षर से इनकार, दान गिनती के नियमों को लेकर एसआईटी जांच में कई अहम सवाल सामने आए।

अयोध्या. अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में जांच तेज होने के बीच ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का एसआईटी को लिखा एक कथित पत्र सामने आया है। वायरल हो रहे इस पत्र में चंपत राय ने दान की गिनती के लिए बनाए गए दिशा-निर्देश (SoP) पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार किया है। साथ ही दावा किया है कि गिनती की प्रक्रिया अनिल मिश्रा और बैंक अधिकारियों ने तय की थी तथा उन्हें इसकी जानकारी जून 2026 में मिली।

कथित पत्र में क्या कहा गया?

वायरल हो रहे कथित पत्र के मुताबिक, 6 फरवरी 2025 को दान की गणना प्रक्रिया के लिए एक SoP तैयार किया गया था, जिस पर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक, अयोध्या शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर बताए गए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि इसकी प्रति महासचिव को भेजे जाने का उल्लेख है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी 13 जून 2026 को अकाउंट ऑफिस से मिली। इसलिए उन्होंने इस SoP को स्वीकार करने से इनकार किया है।

‘मेरे हस्ताक्षर क्यों नहीं लिए गए?’

पत्र में यह भी सवाल उठाया गया है कि अगस्त 2020 से जून 2026 तक ट्रस्ट के सभी महत्वपूर्ण अनुबंधों पर उनके हस्ताक्षर होते रहे, लेकिन दान गिनती जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दिशा-निर्देश पर उनके हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए। यदि वे उस समय अयोध्या में मौजूद नहीं थे, तो उनके लौटने का इंतजार किया जाना चाहिए था।

एसआईटी की प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया?

दान चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में दान की गिनती की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में किसी व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन ट्रस्ट पर तय नियमों का पूरी तरह पालन न करने और बाद में उन्हें शिथिल करने की बात कही गई है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

एसआईटी के अनुसार, मंदिर परिसर में दान की गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए निजी एजेंसी एसआईएस की नियुक्ति की गई थी। एजेंसी का कर्मचारी गणना कक्ष के बाहर निगरानी के लिए तैनात रहता था, लेकिन जांच में पाया गया कि तय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

तलाशी के नियमों में बदलाव का आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2024 में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच हुए एमओयू में यह तय हुआ था कि दान की गणना के दौरान आने-जाने वाले सभी कर्मचारियों की अनिवार्य तलाशी होगी। हालांकि, 6 फरवरी 2025 को जारी नए निर्देशों में इस व्यवस्था को बदलकर नियमित तलाशी की जगह केवल अचानक (रैंडम) तलाशी का प्रावधान कर दिया गया। एसआईटी ने इसे सुरक्षा मानकों में ढील माना है।

जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल वायरल पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, एसआईटी मामले की जांच जारी रखे हुए है। आने वाली विस्तृत जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि दान की गिनती की प्रक्रिया में किस स्तर पर नियमों का पालन हुआ और किन परिस्थितियों में बदलाव किए गए।

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