राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी कार्रवाई, ट्रस्ट और SIT से जवाब तलब
राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।
अयोध्या. अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) से भी जांच की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। ट्रस्ट को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वर्षों पुराने विवाद के बाद अब एक नया कानूनी विवाद सामने आया है और जांच के लिए गठित SIT सबूतों को सुरक्षित रखेगी। इस पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उचित समय पर सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। अदालत ने ट्रस्ट और SIT दोनों से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इससे पहले SIT की प्रारंभिक जांच में चढ़ावे की गिनती से जुड़े प्रबंधन में गंभीर लापरवाही के संकेत मिलने की बात सामने आई थी। मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
चार याचिकाओं पर एक साथ हो रही सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस मामले से संबंधित कुल चार याचिकाएं सूचीबद्ध हैं। इनमें एक याचिका में अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है, जबकि अन्य याचिकाओं में CBI जांच, विशेष जांच टीम के गठन और ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग शामिल है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए ताकि सभी तथ्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन हो सके।
याचिकाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मंदिर में प्राप्त दान और उससे जुड़े अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण आवश्यक है। उनका कहना है कि धार्मिक न्यास सार्वजनिक विश्वास से जुड़े संस्थान होते हैं, इसलिए उनके वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन होना चाहिए। इसी आधार पर अदालत से जांच की निगरानी और दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
SIT के गठन और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल
कुछ याचिकाओं में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि जांच की शुरुआत और गठन की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता आवश्यक है तथा स्वतंत्र जांच से ही सभी पक्षों के सामने वास्तविक स्थिति आ सकेगी। उल्लेखनीय है कि रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था। अब अदालत के समक्ष दायर याचिकाओं में ट्रस्ट के कामकाज और जांच प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं पर न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।




