राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सुप्रीम कोर्ट ने SIT के पुनर्गठन के दिए निर्देश, निष्पक्ष जांच पर जोर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर IPS अधिकारी की अगुवाई में SIT के पुनर्गठन के निर्देश दिए। कोर्ट ने मामले के राजनीतिकरण से बचने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
अयोध्या. राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने संकेत दिया कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में गठित विशेष जांच दल (SIT) के माध्यम से कराई जानी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना है।
सरकार ने कोर्ट को दी जांच की स्थिति
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जांच लगातार जारी है और अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही बताया गया कि शुरुआती जांच के दौरान SIT ने इसे संज्ञेय अपराध माना था, जिसके बाद पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
CJI बोले- अपराध की जांच हो, राजनीति नहीं
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि वर्तमान में जांच किस एजेंसी द्वारा की जा रही है और क्या दोबारा SIT गठित की जा सकती है। इस पर सरकार ने नई SIT गठित करने की सहमति जताई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस पूरे मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। अदालतें राजनीतिक बहस का मंच नहीं हैं और उनका दायित्व केवल यह सुनिश्चित करना है कि अपराध की निष्पक्ष और प्रभावी जांच हो। उन्होंने दोहराया कि यह एक आपराधिक मामला है, इसलिए जांच तथ्यों और कानून के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए।
27 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय की है। तब उत्तर प्रदेश सरकार से नई SIT के गठन और जांच की प्रगति पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने को कहा गया है। अदालत इस बात की समीक्षा करेगी कि जांच निर्धारित दिशा में आगे बढ़ रही है या नहीं और क्या निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।




