ई-कोर्ट सेवाएं और साइबर सुरक्षा: डिजिटल धोखाधड़ी से बचने का मूलमंत्र
अनूपपुर में पैरालीगल वॉलेंटियर्स के लिए साइबर सुरक्षा और ई-कोर्ट सेवाओं पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में विशेषज्ञों ने डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव, ई-फाइलिंग और हेल्पलाइन 1930 के प्रति सचेत किया।
जबलपुर. म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के दिशा-निर्देशों पर अनूपपुर में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष माया विश्वलाल के कुशल मार्गदर्शन में होटल मंदाकिनी के भीतर पैरालीगल वॉलेंटियर्स को “सीआईएस साइबर सुरक्षा” के विषय पर प्रशिक्षित किया गया। इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य समाज में बढ़ते डिजिटल अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलाना तथा न्यायिक प्रक्रियाओं के प्रति आमजन को सचेत करना था।
डिजिटल सुरक्षा और वॉलेंटियर्स की भूमिका
आयोजन के दौरान न्यायाधीश माया विश्वलाल ने वर्तमान डिजिटल युग में डेटा गोपनीयता और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपायों पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सतर्कता ही आधुनिक अपराधों से बचने का एकमात्र सशक्त माध्यम है। वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रावेन्द्र सोनी ने वॉलेंटियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे आम नागरिकों को ई-कोर्ट जैसी आधुनिक न्यायिक सेवाओं से जोड़ने में एक मजबूत कड़ी का काम कर सकते हैं।
ई-कोर्ट सेवाओं का सीधा प्रदर्शन
तकनीकी सत्र के दौरान सिस्टम ऑफिसर पवन सिंह ने उपस्थित लोगों को केस स्टेटस देखने, ई-फाइलिंग और ई-पे जैसी ऑनलाइन न्यायिक प्रक्रियाओं का सीधा प्रदर्शन दिखाया। साइबर सेल के हेड कॉन्स्टेबल राजेन्द्र अहिरवार और जिला सूचना अधिकारी देवेंद्र कुमार देवांगन ने सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत पासवर्ड बनाने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का उपयोग करने और आपात स्थिति में साइबर हेल्पलाइन 1930 की मदद लेने के बारे में विस्तार से समझाया।
जागरूकता फैलाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर सभी पैरालीगल वॉलेंटियर्स ने साइबर सुरक्षा संबंधी संदेश को समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाने का दृढ़ संकल्प लिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर कई न्यायाधीश, जिला विधिक सहायता अधिकारी, अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, लीगल एड डिफेंस काउंसिल्स के अधिवक्ता तथा बड़ी संख्या में वॉलेंटियर्स मौजूद रहे, जिन्होंने इस तकनीकी युग में सुरक्षित रहने के गुर सीखे।




