मध्य प्रदेश

MP में 74 हजार रसोइयों के मानदेय पर सख्ती, e-KYC के बाद ही होगा भुगतान

मध्य प्रदेश में पीएम पोषण योजना के तहत कार्यरत 74 हजार रसोइयों के मानदेय भुगतान से पहले e-KYC, समग्र आईडी और बैंक खातों का सत्यापन अनिवार्य किया गया है। ऑडिट में गड़बड़ियां सामने आने के बाद सरकार ने जांच के निर्देश दिए हैं।

भोपाल. मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले लगभग 74 हजार रसोइयों के मानदेय भुगतान को लेकर सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अब सभी रसोइयों का भुगतान e-KYC और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही किया जाएगा। यह कदम ऑडिट के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद उठाया गया है।

ऑडिट में सामने आईं कई गड़बड़ियां

पीएम पोषण पोर्टल की समीक्षा के दौरान कई मामलों में रसोइयों के नाम और पते सही पाए गए, लेकिन उनसे जुड़े बैंक खाते अलग-अलग व्यक्तियों के दर्ज मिले। कुछ मामलों में एक ही रसोइए का पंजीयन एक से अधिक स्कूलों में भी दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इन अनियमितताओं के बाद पूरी प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी गई है।

भौतिक सत्यापन के निर्देश, गड़बड़ी पर होगी एफआईआर

पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सभी रसोइयों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो संबंधित मामलों में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। सभी जिलों को 20 जुलाई तक ऑनलाइन जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

e-KYC और बैंक खातों का होगा मिलान

सभी रसोइयों की e-KYC, समग्र आईडी और आधार से जुड़े बैंक खातों का सत्यापन किया जाएगा। पोर्टल पर सही और प्रमाणित जानकारी अपडेट होने के बाद ही मानदेय जारी किया जाएगा। यदि किसी विद्यालय में निर्धारित संख्या से अधिक रसोइए पंजीकृत पाए जाते हैं, तो अतिरिक्त रसोइयों का भुगतान नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में अतिरिक्त मानदेय का वित्तीय दायित्व संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी को ही वहन करना होगा।

निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था मजबूत

भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एजुकेशन पोर्टल की लॉगिन प्रणाली को पीएम पोषण पोर्टल से एकीकृत किया गया है। अब स्कूलों के प्रधानाध्यापक अपनी अधिकृत यूजर आईडी के माध्यम से ही पोर्टल का संचालन करेंगे। विकासखंड स्तर पर समन्वयकों के लिए भी अलग पंजीकृत लॉगिन आईडी अनिवार्य की गई है, ताकि रिकॉर्ड का नियमित सत्यापन और निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।

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