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15 जुलाई तक जारी करनी होगी ओलंपिक चयन नीति, खेल मंत्रालय ने तय की समय सीमा

खेल मंत्रालय ने सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों को 15 जुलाई 2026 तक लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन पाथवे और एथलीट चयन मानदंड सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं।

लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक की तैयारियों को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि प्रत्येक महासंघ 15 जुलाई 2026 तक अपने क्वालिफिकेशन पाथवे, एथलीट चयन मानदंड और चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करे, ताकि खिलाड़ियों को समय रहते पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके।

साई और राज्य संघों के साथ भी साझा करनी होगी नीति

मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि सभी राष्ट्रीय खेल महासंघ अपनी चयन नीति स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) तथा संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल संघों के साथ भी साझा करें। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों और कोचिंग तंत्र को चयन प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी देना है, जिससे तैयारी और प्रदर्शन की दिशा पहले से तय की जा सके।

आईओसी के दिशा-निर्देशों के आधार पर बनेगी चयन प्रक्रिया

खेल मंत्रालय ने बताया कि लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) पहले ही क्वालिफिकेशन सिस्टम जारी कर चुकी है। इसी ढांचे के आधार पर भारतीय खेल महासंघ अपनी-अपनी चयन नीति तैयार करेंगे। इससे विभिन्न खेलों में चयन प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लागू करने में आसानी होगी।

दो साल पहले सार्वजनिक होंगे चयन मानदंड

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल, पैरा एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े बहु-खेल आयोजनों के लिए चयन मानदंड संबंधित प्रतियोगिता शुरू होने से कम से कम दो वर्ष पहले सार्वजनिक किए जाने चाहिए। इस व्यवस्था का उद्देश्य खिलाड़ियों को पर्याप्त समय देना है, ताकि वे निर्धारित मानकों के अनुरूप अपनी तैयारी कर सकें।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर रहेगा विशेष फोकस

मंत्रालय के अनुसार इस पहल का मुख्य उद्देश्य चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। क्वालिफिकेशन पाथवे और चयन मानदंड सार्वजनिक होने से खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों को पूरी प्रक्रिया पहले से स्पष्ट रहेगी। इससे भ्रम की स्थिति कम होगी और चयन प्रणाली अधिक निष्पक्ष एवं भरोसेमंद बन सकेगी।

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