मध्य पूर्व तनाव ने लिया नया मोड़, ट्रंप, मैक्रों और मेलोनी समेत कई नेताओं पर निशाना साधने का दावा
ईरान से जुड़े एक विवादित ऑनलाइन प्रकाशन में ट्रंप समेत 13 वैश्विक नेताओं की कथित 'हिट लिस्ट' सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ गया है। मोजतबा खामेनेई के बयान के बाद इस घटनाक्रम ने नई कूटनीतिक बहस छेड़ दी है।

तेहरान. मध्य पूर्व में जारी तनाव अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी गहराता दिखाई दे रहा है। ईरान के तेहरान नगर पालिका से जुड़े एक रूढ़िवादी समाचार पत्र हमशहरी के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित एक विवादित सूची ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। इस सूची में अमेरिका, इजरायल और यूरोप के कई प्रमुख नेताओं की तस्वीरें शामिल की गई हैं। प्रकाशन में इन नेताओं को ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का जिम्मेदार बताया गया है। हालांकि, इस सूची की आधिकारिक सरकारी पुष्टि नहीं की गई है।
मोजतबा खामेनेई के पहले संदेश के बाद बढ़ा विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली है। सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देने वाले मोजतबा ने अपने पहले लिखित संदेश में कहा कि उनके पिता की मौत का बदला लिया जाएगा और जिम्मेदार लोगों को इसका परिणाम भुगतना होगा। इस बयान के तुरंत बाद विवादित सूची सामने आने से इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कथित सूची में किन नेताओं के नाम शामिल
ऑनलाइन प्रकाशित सूची में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अलावा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज और गिदोन सार का नाम शामिल बताया गया है। इसके साथ ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया कि यह सूची केवल डिजिटल संस्करण में प्रकाशित हुई, जबकि प्रिंट संस्करण में इसे जगह नहीं मिली।
यूरोपीय देशों पर गंभीर आरोप
ईरान लंबे समय से ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों पर अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने का आरोप लगाता रहा है। तेहरान का दावा है कि इन देशों ने ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई की निंदा नहीं की और अमेरिकी सैन्य अभियानों को अप्रत्यक्ष सहयोग दिया। इसी कारण ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
युद्धविराम टूटने के बाद फिर बढ़ा टकराव
हालिया घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में हुआ युद्धविराम प्रभावी नहीं रह पाया है और दोनों पक्षों के बीच फिर से हमलों का दौर शुरू हो चुका है। इससे पूरे मध्य पूर्व में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका और गहरा गई है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान को किसी भी कथित साजिश या हमले के प्रयास को लेकर कड़ी चेतावनी दे चुके हैं। मौजूदा हालात ने वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को एक बार फिर गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है।




