बस्तर के किसानों के लिए नया अवसर, जैविक प्रमाणन से तीन से चार गुना बढ़ सकती है आय
छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की तैयारी में है। जैविक प्रमाणन, सहकारी मॉडल और निर्यात रणनीति के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और यूरोप सहित वैश्विक बाजारों तक उत्पाद पहुंचाने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है।
रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग की जैविक खेती को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू की है। सरकार उन गांवों की पहचान करेगी जहां किसानों ने आज तक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। ऐसे गांवों का जैविक प्रमाणन कर उनकी प्राकृतिक कृषि पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है।
बस्तर प्रवास के अनुभव से तैयार हुई योजना
हालिया बस्तर दौरे के दौरान नारायणपुर और कांकेर के कई गांवों में किसानों ने बताया कि वे वर्षों से बिना रासायनिक उर्वरकों के खेती कर रहे हैं। इसी अनुभव के आधार पर सरकार ने इन क्षेत्रों को राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) से जोड़ने की योजना बनाई है। जैविक प्रमाणन मिलने के बाद इन उत्पादों को देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति तैयार की जाएगी।
जैविक प्रमाणन से बढ़ेगी किसानों की आय
सरकार का मानना है कि प्रमाणित जैविक उत्पादों को बाजार में अधिक मूल्य मिलता है। जैविक प्रमाणन के बाद किसानों को वर्तमान कीमत की तुलना में तीन से चार गुना तक बेहतर दाम मिलने की संभावना है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा और बस्तर की कृषि पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
निर्यात के लिए बनेगी मजबूत व्यवस्था
बैठक में जैविक उत्पादों के निर्यात को लेकर गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम और सहभागी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना बनाई गई है। गांव स्तर पर सहकारी समितियों के गठन के माध्यम से किसानों को उत्पादन और विपणन की प्रक्रिया में भागीदार बनाया जाएगा, जिससे निर्यात व्यवस्था अधिक मजबूत हो सके।
बस्तर के जिलों में होगा सर्वे और परीक्षण
सरकार ने संयुक्त दलों का गठन कर नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों का सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया है। ये दल कृषि विभाग और संबंधित विशेषज्ञों के साथ जैविक क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे तथा आवश्यक परीक्षण और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद ग्राम पंचायत स्तर पर जैविक प्रमाणन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी और स्थानीय उत्पादों को ‘बिहान’ के ‘छत्तीसकला’ ब्रांड के माध्यम से निर्यात के लिए तैयार किया जाएगा।
प्रमाणन प्रक्रिया में राहत और संस्थाओं का सहयोग
सरकार ने बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए जैविक प्रमाणन के लिए आवश्यक तीन वर्ष की अवधि में छूट देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी की है। साथ ही वनोपज को निर्यात योग्य बनाने के लिए भी विशेष योजना तैयार की जाएगी, ताकि स्थानीय लोगों को बेहतर मूल्य मिल सके। जैविक प्रमाणन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए राज्य की प्रमाणन संस्थाओं और संबंधित विभागों के सहयोग से सभी प्रशासनिक और तकनीकी कदम तेजी से पूरे किए जाएंगे।




