मध्य प्रदेश

नर्सिंग भर्ती में बड़ा बदलाव: 100% महिला आरक्षण खत्म, 286 पदों पर फिर से आवेदन

एमपी नर्सिंग कॉलेज भर्ती में महिलाओं को 100% आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक। 286 पदों पर अब पुरुष उम्मीदवार भी होंगे शामिल, सरकार से मांगा गया लिखित जवाब।

जबलपुर. मध्य प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और सिस्टर ट्यूटर के कुल 286 पदों पर अब महिलाओं को 100 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलेगा। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पुरुष उम्मीदवारों की याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान यह अहम जानकारी सामने आई। हाईकोर्ट में मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया है।

हाईकोर्ट में ईएसबी का पक्ष

ईएसबी की ओर से पेश अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने कोर्ट को बताया कि पुरुष अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का फैसला ले लिया गया है, हालांकि इसका लिखित आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है। यह याचिका जबलपुर निवासी नौशाद अली द्वारा दायर की गई है, जिसमें महिला उम्मीदवारों को 100 फीसदी आरक्षण देने को चुनौती दी गई थी।

16 दिसंबर को जारी हुआ था विज्ञापन

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने बताया कि 16 दिसंबर को प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें—

  • 40 एसोसिएट प्रोफेसर
  • 28 असिस्टेंट प्रोफेसर
  • 218 सिस्टर ट्यूटर

इन सभी पदों को केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया था। आवेदन की अंतिम तिथि 7 जनवरी, 2026 तय की गई थी।

सिर्फ पुरुष होने के आधार पर बाहर किए गए अभ्यर्थी

याचिका में कहा गया कि मध्य प्रदेश के ऐसे कई पुरुष उम्मीदवार, जो समान योग्यता रखते हैं, उन्हें सिर्फ पुरुष होने के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। जबकि भर्ती नियम और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) के मापदंड लिंग के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देते हैं।

संविधान और 50% आरक्षण सीमा के उल्लंघन का आरोप

  • याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह भर्ती प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16(2) का उल्लंघन है।
  • साथ ही सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले में तय की गई 50% आरक्षण सीमा का भी उल्लंघन किया गया है।
  • याचिका में कहा गया कि प्रदेश की आरक्षण नीति और भर्ती नियम-2023 में कहीं भी पुरुषों को केवल लिंग के आधार पर अपात्र ठहराने का प्रावधान नहीं है।

68 पदों पर पुरुषों को किया गया था अपात्र

मामला सामने आने के बाद सरकार ने सिस्टर ट्यूटर के 218 पदों को फिलहाल भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया था, लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के कुल 68 पदों पर पुरुष उम्मीदवारों को अपात्र मानते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी।

अगली सुनवाई 7 जनवरी को

हाईकोर्ट ने सरकार से इस पूरे मामले में लिखित जवाब मांगा है। चूंकि आवेदन की अंतिम तिथि 7 जनवरी है, इसलिए कोर्ट ने अगली सुनवाई भी उसी दिन निर्धारित की है। कोर्ट को सरकार ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया है कि अब भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल किया जाएगा।

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